संपादकीय

संपादकीय: हादसों से सबक लेने की जरूरत

Editorial: भीषण गर्मी के मौसम में शॉट सर्किट और अन्य कारणों से अग्निकांड तो होते ही रहते हैं लेकिन किसी बड़ी इमारत में आग लगने से कई जिंदगियां खत्म हो जाएं तो इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ के रिहासी इलाके अलीगंज में स्थित एक बहुमंजिला कर्मशियल बिल्डिंग में आग लगने से पंचद्र छात्रों की मौत होना निश्चित रूप से हृदय विदारद घटना है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कतई नहीं बख्शा जाना चाहिए। इस दुर्घटना का दुखद पहलू यह है कि जिन छात्रों की मौत हुई है।

वे आग में नहीं जले हैं बल्कि दम घुटने के कारण उनकी दर्दनाक मौत हुई है। इस बिल्डिंग से निकाषी का कोई रास्ता उपलब्ध न हो पाने के कारण वे छात्र बाथरूम में शरण लेने पहुंचे थे जहां दम घुटने से वे काल का ग्रास बन गये। इस घटना के बाद उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल घटना की जांच के आदेश दे दिये और उस बिल्डिंग के मालिक की गिरफ्तारी भी हो गई तत्काल चार अफसरों को निलंबित भी कर दिया गया और अन्य 16 आरोपी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा दी गई है।

तथा मृतकों के परिजनों के लिए दो दो लाख रूपये की अनुग्रह राशि भी स्वीकृत कर दी गई है किन्तु इन सब से उन घरों में तो रौशनी नहीं आएगी जिन घरों के चिराग बुझ गये हैं। पीडि़त परिजनों को तभी न्याय मिलेगा जब इस भीषण अग्रिकांड के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी। इसके लिए उन्हें उस बिल्डिंग के मालिक या कोचिंग सेन्टर के संचालक भी जिम्मेदार नहीं है

बल्कि वह पूरा प्रशासनिक हमला भी इसके लिए दोषी है जिसने सरकारी नियमों को बला-ए-ताक पर रखकर कमर्शियल बिल्डिंग बनाने की इजाजत दी थी। इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी कड़ी सजा दी जानी चाहिए और ऐसे हादसों से सबक लेकर सरकार को कारगर कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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