छत्तीसगढ़देश

एनएच पर पैदल यात्रियों की मौतों का आंकड़ा चिंताजनक, हर तीसरा व्यक्ति गंवा रहा जान

The number of pedestrian deaths on the NH is worrying

नई दिल्ली/ए.। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सड़क सुरक्षा के लिए जितने भी दावे लगातार कर रहा है, वह सब एक बार फिर खोखले साबित हुए हैं। 2024 में हुए सड़क हादसों और उनमें प्रभावितों का आंकड़ा तो पहले ही आ चुका था, लेकिन हाल ही में मंत्रालय द्वारा जारी 2024 की रिपोर्ट ने इस चिंताजनक तथ्य को उजागर किया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पैदल यात्रियों के लिए अधिक जानलेवा साबित हो रहे हैं।
2019 से 2024 के बीच 1.8 लाख से अधिक पैदल यात्रियों की जान सड़क हादसों में गई है, जिसमें से राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई मौतों का आंकड़ा 30 प्रतिशत से अधिक है। यानी सड़क दुर्घटना का शिकार बन रहा हर तीसरा पैदल यात्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर जान गंवा रहा है। ध्यान रहे कि हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। तमाम दावों और वादों के बावजूद सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 में 4,80,583 हादसों में 1,72,890 लोगों की जान गई, जबकि 4,62,825 घायल हुए। वहीं, 2024 में हादसे बढ़कर 4,87,707 तो मृतक 1,77,175 और घायल 4,71,441 हो गए। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 से 2024 के बीच प्रतिवर्ष औसतन 30,500 से ज्यादा पैदल चलने वालों की मौत हुई।
आंकड़ों की बात करें तो इन वर्षों में कुल 1,82,678 पैदल यात्रियों की जान गई, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या 57,690 रही, जो कुल का 31.58 प्रतिशत है। हालांकि, सर्वाधिक मृत्यु दोपहिया वाहन सवारों की हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाले कुल सड़क हादसों में दोपहिया वाहनों से जुड़े हादसे 43.0 प्रतिशत थे और कुल मौतों में इनसे जुड़ी मौतें 45.1 प्रतिशत रहीं।

ओवर स्पीडिंग के कारण दुर्घटनाएं 4 फीसदी बढ़ा

दरअसल, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023 के मुकाबले 2024 में नशे में गाड़ी चलाने के कारण होने वाले हादसों में 16.4 प्रतिशत, जबकि मौतों में 24.8 प्रतिशत की कमी आई है। गलत दिशा से वाहन चलाने वाले मामलों में 8.8 प्रतिशत की कमी, रेड लाइट जंप के कारण हादसों में 45.7 प्रतिशत की गिरावट, मोबाइल फोन के उपयोग के कारक में 29.9 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, ओवरस्पीडिंग के कारण दुर्घटनाएं चार प्रतिशत तो मृत्यु का आंकड़ा 5.5 प्रतिशत बढ़ा है।

पैदल यात्रियों की मौत में तमिलनाडु सबसे आगे, बिहार नंबर दो

2024 की रिपोर्ट से पता चलता है कि तमिलनाडु में पैदल चलने वालों की मौत के सबसे ज्यादा मामले (4,712) दर्ज किए गए, इसके बाद बिहार (4,149), महाराष्ट्र (3,344) और पश्चिम बंगाल (3,241) का नंबर आता है। 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 50 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में पैदल चलने वालों की मौत के 4,328 मामले दर्ज किए गए, जो इस तरह की कुल मौतों का 11.8 ‘ था।

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