
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी से मंजिल नहीं मौत मिल रही, रफ्तार, नशा और लापरवाही से उजड़ रहे हजारों परिवार
छत्तीसगढ़ की सड़कें अब सिर्फ सफर का रास्ता नहीं रहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए मौत का पर्याय बनती जा रही हैं। हर दिन कहीं तेज रफ्तार कहर बरपा रही है तो कहीं शराब और नशे में धुत चालक लोगों की जिंदगी छीन रहे हैं। सड़क हादसों का बढ़ता ग्राफ इस बात की गवाही दे रहा है कि लापरवाही और नियमों की अनदेखी कितनी भयावह कीमत वसूल रही है। दुर्घटनाओं में सिर्फ वाहन नहीं टकराते, बल्कि सपने बिखर जाते हैं, परिवार उजड़ जाते हैं और मासूम बच्चों के सिर से अपनों का साया हमेशा के लिए छिन जाता है। किसी घर का कमाने वाला सदस्य चला जाता है। हादसों में केवल जानें नहीं जातीं, बल्कि अनगिनत परिवारों की खुशियां भी उजड़ जाती हैं। सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं, जहां हर हादसा व्यवस्था, जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन, नशे में वाहन चलाने पर कठोर कार्रवाई और जनजागरुकता ही इस बढ़ते खतरे पर प्रभावी नियंत्रण का रास्ता है।
ड़कों पर बढ़ता खतरा: हादसे बढ़े, हजारों परिवार उजड़े
रायपुर/नवप्रदेश। छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाएं लगातार गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश में 15,318 सड़क (The road snatched away loved ones) हादसे दर्ज किए गए, जो वर्ष 2024 के 14,857 हादसों की तुलना में 461 अधिक हैं। हालांकि कुल मौतों की संख्या 2024 के 6,945 से घटकर 2025 में 6,728 रही, लेकिन यह आंकड़ा अब भी बेहद चिंताजनक है। इसका अर्थ है कि प्रदेश में औसतन हर दिन 18 से अधिक लोगों की जान सड़क हादसों में जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार, नशे में वाहन चलाना, यातायात नियमों की अनदेखी और सड़क इंजीनियरिंग की खामियां दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद हादसों की रफ्तार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है।
हादसों के पीछे ये कारण
किन जिलों में बढ़ी चिंता?
महासमुंद : मौतों में 16′ वृद्धि
ठ्ठ दुर्ग-भिलाई : मौतों में 24 ‘ वृद्धि
ठ्ठ कबीरधाम : मौतों में 32′ वृद्धि
ठ्ठ कांकेर : मौतों में 11′ वृद्धि
ठ्ठ सुकमा : मौतों में 54′ वृद्धि
ठ्ठ दंतेवाड़ा : घायलों की संख्या में 115′ तक वृद्धि
(इन जिलों में सड़क सुरक्षा उपायों को और सख्त करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।)
पुलिस का एक्शन प्लान
सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस द्वारा
स्पीड गन से निगरानी
हाईवे पर सीसीटीवी कैमरे
ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई
ब्लैक स्पॉट की विशेष मॉनिटरिंग
त्योहार और वीकेंड पर अतिरिक्त पेट्रोलिंग
स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान
पांच वर्षों में 46′ बढ़ी मौतें
यदि 2020 और 2025 की तुलना की जाए तो सड़क (The road snatched away loved ones) दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या 4,606 से बढ़कर 6,728 हो गई है। यानी पांच वर्षों में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयास अभी भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों में मौत की वर्षवार तस्वीर
वर्ष सड़क हादसों में मौतें
2020 4,606
2021 5,371
2022 5,834
2023 6,300
2024 6,945
2025 6,898
2026
(2023 का विस्तृत राज्य स्तरीय अंतिम आंकड़ा विभिन्न विभागीय रिर्पोटों में अलग-अलग उपलब्ध है। 2020-2022 के आंकड़े सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित हैं।)
विधानसभा में उठा था सड़क हादसों का मुद्दा
2026 के छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान सड़क हादसों का प्रश्न उठा था। इस पर परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने बताया था कि प्रदेश में बीते एक वर्ष में सड़क दुर्घटनाओं में 6,898 लोगों की मौत हुई है। रायपुर दक्षिण से भाजपा विधायक सुनील सोनी ने विधानसभा में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति, मुआवजा प्रावधान और रोकथाम के उपायों को लेकर सवाल उठाया था। जवाब में परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि प्रदेश में बीते एक वर्ष में सड़क दुर्घटनाओं में 6,898 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा रायपुर जिले को ‘जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्टÓ में शामिल किया गया है।
6 वर्षों में छत्तीसगढ़ में 79,523 सड़क दुर्घटना
25 फरवरी, 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा को सूचित किया था कि पिछले छह वर्षों में छत्तीसगढ़ में 79,523 सड़क दुर्घटनाओं में 33,700 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और 70,255 अन्य लोग घायल हो गए हैं। बजट सत्र के दूसरे दिन भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्रकार ने एक गैर-तारांकित प्रश्न उठाया था, जिसमें सरकार की तरफ से उत्तर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने माना पैदल चलना मौलिक अधिकार
पैदल यात्रियों की बढ़ती मौतों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि सुरक्षित रूप से पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए स्पष्ट रूप से सीमांकित फुटपाथ और सुरक्षित पैदल मार्ग सुनिश्चित किए जाएं। इससे पहले भी शीर्ष अदालत फुटपाथों के अतिक्रमण और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सख्त टिप्पणी कर चुकी है।
54 फीसदी हादसे दोपहिया और कार से हुए
मंत्रालय की ओर से 2024 के लिए जारी सड़क दुर्घटनाओं के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि कुल 36526 दुर्घटनाओं में से लगभग 54 ‘ दुर्घटनाएं दो-पहिया वाहनों और कारों के साथ हुईं, जिनमें 19,680 लोगों की जान चली गई। हाल के वर्षों में भी यही ट्रेंड देखा गया है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पता चलता है कि पैदल चलने वालों के लिए अलग और सुरक्षित फुटपाथ और क्रॉसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी ही भारत में पैदल चलने वालों की मौत का सबसे बड़ा कारण है, और यह संख्या दुनियाभर में सबसे ज्यादा है।



