संपादकीय: संसद में एनडीए की बढ़ती ताकत

Editorial: पिछले लोकसभा चुनाव में चार सौ पार का नारा जोर शोर से उछालने वाली भाजपा भले ही 340 सीटों पर सिमट गई थी किंतु आपरेशन लोटस चलाकर वह लगातार संसद में आपनी ताकत बढ़ा रही है। विपक्षी पार्टियों में बिखराव और तृणमूल कांग्रेस में टूट के बाद एनडीए अब राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल करने से बस कुछ ही कदम दूर रह गई है। 245 सदस्यीय राज्यसभा में एनडीए के सांसदों की संख्या बढ़कर 155 हो गई है। और नौ राज्यसभा सदस्य एनडीए के चुन लिए जाते हैं तो वह दो तिहाई बहुमत हासिल कर नया इतिहास रच देगी। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों की बगावत के बाद राज्यसभा में भाजपा और एनडीए की ताकत बढ़ी है।
इस बीच टीएमसी में मचे कोहराम के दौरान टीएमसी के तीन राज्यसभा सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। उसके लिए जब चुनाव होंगे तो बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली प्रचंड जीत को मद्देनजर रखकर तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा की जीत सुनिश्चित है। इसके बाद राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए एनडीए को सिर्फ छह सांसदों की ही जरूरत रहेगी। यह कमी भी एन केन प्रकारेण पूरी कर ही ली जाएगी। यदि ऐसा हुआ तो एनडीए सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद के उच्च सदन में पारित कराना चुटकी बजाने जैसा आसान काम हो जाएगा। जिसका विपक्ष पुरजोर ढंग से विरोध भी नहीं कर पाएगा क्योंकि राज्यसभा में इंडी गठबंधन की संख्या घटकर सिर्फ 63 रह गई है। इसमें आगे चलकर और कमी आ सकती है।
इसी तरह लोकसभा में भी एनडीए की ताकत में लगातार इजाफा होता जा रहा है। टीएमसी के बीस सांसदों के अलग होकर नई पार्टी में शामिल हो जाने और एनडीए का समर्थन करने की घोषणा कर देने से लोकसभा में एनडीए की संख्या अब 314 हो गई है। इस बीच शिवसेना यू बीटी में भी टूट की अटकलें लगाई जा रही हैं उसके नौ में से सात सांसद उद्धव ठाकरे से पल्ला झाड़ कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का हिस्सा बन सकते हैं। ऐसे में लोकसभा में एनडीए की संख्या बढ़कर 321 हो जाएगी। हालाकि वह लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के जादूई आंकड़े से काफी दूर रहेगी लेकिन लोकसभा में उसकी ताकत बढऩे के बाद वह महत्वपूर्ण विधेयकों को फ्लोर मैनेजमेंट के जरिए पारित कराने में सफल हो सकती है।
टीएमसी और शिवसेना यू बीटी की तरह ही शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा सहित कुछ अन्य पार्टियों में भी बगावत हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं कि राज्यसभा की तरह लोकसभा में भी एनडीए दो तिहाई बहुमत के निकट पहुंच जाए। गौरतलब है कि एनडीए को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में ही स्पष्ट बहुमत प्राप्त है किन्तु महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने से पूर्व परिसीमन संसोधन विधेयक को पारित कराने के लिए उसे दोनों ही सदनों में दो तिहाई बहुमत की दरकार थी लेकिन दो तिहाई बहुमत न हो पाने के कारण संसद के पिछले बजट सत्र में परिसीमन विधेयक पारित हो नहीं पाया।
अब इसे पारित कराने के लिए एनडीए को दोनों ही सदनों में दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता है यही वजह है कि वह दो तिहाई बहुमत के लिए कवायद कर रही है। टीएमसी और शिवसेना सहित अन्य पार्टियों में बगावत होना एनडीए की राह को असान बना रहा है। यदि निकट भविष्य में संसद के दोनों ही सदनों में एनडीए को किसी भी तरह से दो तिहाई बहुमत हासिल हो जाता है तो वह अन्य सभी पेंडिग महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने में सफल हो जाएगी।



