Consumer Court : गलत ईंधन भरना पड़ा महंगा, उपभोक्ता आयोग ने पेट्रोल पंप को ठहराया दोषी
राजधानी रायपुर में पेट्रोल पंप की एक लापरवाही का मामला आखिरकार उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां वाहन मालिक को राहत (Consumer Court) मिली। डीजल वाहन में गलत ईंधन भरने के कारण गाड़ी खराब होने और आर्थिक नुकसान की शिकायत पर आयोग ने सुनवाई के बाद पेट्रोल पंप प्रबंधन को जिम्मेदार माना।
इस फैसले के बाद वाहन चालकों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि ईंधन भरते समय थोड़ी सी लापरवाही भी वाहन मालिक को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। आयोग के आदेश को उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़े अहम फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
डीजल वाहन में भर दिया पेट्रोल Consumer Court
मामला अमलीडीह निवासी दीपांकर साहा और वीआईपी इस्टेट स्थित साईं कृपा फ्यूल्स के बीच का है। परिवादी के अनुसार 29 नवंबर 2019 को वह अपनी टाटा जेस्ट कार में 600 रुपये का डीजल भरवाने पहुंचे थे। उन्होंने कर्मचारी को डीजल भरने के लिए कहा था, लेकिन गलती से वाहन में पेट्रोल भर दिया गया। कुछ दूरी तय करने के बाद कार बंद हो गई और इंजन में गंभीर खराबी आ गई।
मरम्मत में हुआ भारी खर्च
परिवादी ने आयोग को बताया कि वाहन के फ्यूल टैंक पर डीजल स्पष्ट रूप से लिखा (Consumer Court) हुआ था, इसके बावजूद गलत ईंधन भर दिया गया। वाहन की मरम्मत में एक लाख रुपये से अधिक खर्च करना पड़ा। ट्रैवल्स व्यवसाय से जुड़े होने के कारण वाहन बंद रहने से उनकी आय पर भी असर पड़ा। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर कर आर्थिक नुकसान, मानसिक पीड़ा और अन्य खर्चों को आधार बनाते हुए तीन लाख रुपये तक की क्षतिपूर्ति की मांग की।
पेट्रोल पंप ने किया बचाव
सुनवाई के दौरान पेट्रोल पंप प्रबंधन ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके यहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही ईंधन भरा जाता है। साथ ही यह भी कहा गया कि संबंधित वाहन में उनके पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाने के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि आयोग ने दोनों पक्षों के दस्तावेज और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने माना सेवा में कमी
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने माना कि वाहन मालिक को हुआ नुकसान पेट्रोल पंप कर्मचारियों की लापरवाही का परिणाम है और यह सेवा में स्पष्ट कमी का मामला (Consumer Court) है। आयोग ने पेट्रोल पंप प्रबंधन को घटना की तारीख से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 25100 रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 25000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 5000 रुपये का भुगतान भी 45 दिनों के भीतर करने के निर्देश दिए गए।



