Opposition’s Outcry Against SIR: एसआईआर के खिलाफ विपक्ष का हल्लाबोल
Opposition’s Outcry Against SIR: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के खात्मे की मांग को लेकर विपक्ष का हल्लाबोल तीसरे दिन भी जारी रहा। राजधानी नई दिल्ली से लेकर मुंबई तक विपक्षी पार्टियों का धरना प्रदर्शन बदस्तूर जारी है। इस बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने पार्टी की तीन सूत्रीय मांगे रखी हैं उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Opposition’s Outcry Against SIR) का तत्काल इस्तीफा हो और एसआईआर रद्द किया जाये और इवीएम के बदले फिर से बैलेट पेपर पर चुनाव कराये जाएं।
कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने तो अब तक हुए सभी चुनावों को असंवैधानिक करार देते हुए फिर से लोकसभा चुनाव कराने और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की भी मांग कर दी है। आम आदमी पार्टी और कॉरोच जनता पार्टी तथा वामपंथी पार्टियां भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर की प्रक्रिया को रोकने की मांग को लेकर निरंतर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों को देखकर लगता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध की आवाज आगे और तेज होगी और इस आंदोलन का भी विस्तार होगा।
सभी विपक्षी पार्टियों को अपनी मांगों के लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार है लेकिन आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेताओं को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। मुंबई में आंदोलन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए जिस तरह तू तड़ाक की और असभ्य भाषा बोली है वह कतई उचित नहीं है। ऐसे नेता शालीनतापूर्वक भी अपनी बात रख सकते हैं।
बद्जुबानी करने से उन्हें भले ही मीडिया की सुर्खियां मिल जाये लेकिन वे लोगों की सहानुभूति खो सकते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि चुनाव आयुक्त (Opposition’s Outcry Against SIR) और एसआईआर की प्रक्रिया के विरोध में आंदोलन के दौरान बद्जुबानी से बचा जाये और अपनी मांगों को सभ्यता के दायरे में पुरजोर ढंग से रखा जाये अन्यथा ऐसे आंदोलन जनसमर्थन खोकर निष्प्रभावी सिद्ध होंगे।



