Supreme Court’s strong remarks: महिला सुरक्षा पर सुको की कड़ी टिप्पणी
Supreme Court’s strong remarks : देश की राजधानी नई दिल्ली में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को स्वत: संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि असमाजिक तत्वों और अपराधियों में कानून का खौफ होना चाहिए। यदि कोई महिलाओं के प्रति अपराध करता है तो उसके मन में यह भय होना चाहिए कि वह मारा जाएगा। संभवत: पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इतनी कड़ी टिप्पणी की है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से महिलाओं के प्रति अपराध की रिपोर्ट भी तलब की है और चार सप्ताह बाद इस मामले में फिर से सुनवाई की तारीख तय की है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court’s strong remarks ) ने दिल्ली पुलिस को निर्देशित किया है कि वह स्कूलों कॉलेजों और पार्कों सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के व्यापक इंतेजाम करें इसके तहत सीसीटीवी कैमरे लगाये जायें। महिलायें रात में भी खुद को सुरक्षित महसूस करें यह दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि 2012 में बहुचर्चित निर्भया कांड के बाद देशव्यापी आंदोलन छिड़ा था और इसके बाद महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और पीडि़त महिलाओं को त्वारित न्याय दिलाने के लिए तत्कालीन केन्द्र सरकार ने कड़े कदम (Supreme Court’s strong remarks ) उठाये थे इसके बाद रेप के आरोपियों की सजा को और सख्त बनाने का काम मौजूदा एनडीए सरकार ने भी किया है। इसके बावजूद महिलाओं के प्रति हिंसा और रेप की घटनाओं में कोई कमी नहीं आ रही है।
इसके विपरीत महिलाओं के प्रति अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। महिलायें आज न तो घर में सुरक्षित हैं न ही बाहर सुरक्षित हैं। उनके भीतर असुरक्षा की भावना इस कदर घर कर चुकी है इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब नई दिल्ली के एक विश्व विद्यालय की छात्राओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। समय-समय पर रेप के आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग भी उठती रही है। ताकि आपराधिक तत्वों में कानून के प्रति भय पैदा हो।
बहरहाल नई दिल्ली और एनसीआर में रेप की बढ़ती घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो सख्त रूप अख्तियार किया है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अब नई दिल्ली पुलिस और अधिक (Supreme Court’s strong remarks ) चौंकसी के साथ महिलाओं की सुरक्षा करेगी। बात सिर्फ देश की राजधानी नई दिल्ली की ही नहीं है बल्कि देश के अन्य नगरों और महानगरों में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है यह भारत के लिए शर्म की बात है कि विदेशों से पर्यटन के लिए भारत आने वाली महिलाओं के लिए वहां की सरकारों को यह एडवाइजरी जारी करनी पड़ती है कि वे भारत में भ्रमण के दौरान सतर्कता बरतें और अकेले कहीं जाने से बचें।
इसी से स्पष्ट है कि भारत में महिला सुरक्षा का सवाल कितना सोचनीय और चिंतनीय बन चुका है। देश की आधी आबादी को सुरक्षित माहौल मिले इसके लिए सरकार को भी कारगर कदम उठाने होंगे और महिलाओं के प्रति अपराध को रोकने के लिए और कड़े कानूनी प्रावधान करने पड़ेंगे।



