संपादकीय

The Battle of the House Moves to the Streets : सदन की लड़ाई सड़क पर

जो लड़ाई सदन (The Battle of the House Moves to the Streets) में लड़ी जानी चाहिए वह सड़क पर लड़ी जा रही। एसआईआर के विरोध में और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर पिछले एक पखवाड़े से विपक्ष सड़क की लड़ाई लड़ रहा है तो अब सत्ता पक्ष भी सड़क पर उतर आया है। कांग्रेस के नेतृत्व में इंडी गठबंधन ने वोट बचाओ, देश बचाओ आंदोलन छेड़ रखा है तो इसके जवाब में सत्ता पक्ष ने राष्ट्र व्यापी आंदोलन का श्रीगणेश कर दिया है। भाजपा देश भर में जगह जगह लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ मार्च निकाल रही है। दोनों ही एक दूसरे को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बता रहे और परस्पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

आम जनता समझ ही नहीं पा रही है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को आखिर किससे खतरा है? जब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही खुद को लोकतंत्र का सच्चा सेनानी बता रहे हैं तो लोकतंत्र भला खतरे में कैसे पड़ सकता है? कांग्रेस के नेतृत्व में इंडी गठबंधन ने 1 नवंबर को देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित रामलीला मैदान में महारैली की। जिसमें दस लाख की भीड़ जुटाने का दावा किया गया था जो खोखला सिद्ध हुआ।

बमुश्किल पचास से साठ हजार लोग ही जुटे और इसमें से भी हजारों लोग रामलीला मैदान में जाने की जगह नई दिल्ली का सैर सपाटा करने निकल गए। ये वही लोग थे जिन्हें अन्य राज्यों से बसों में भरकर लाया गया था। (The Battle of the House Moves to the Streets) रामलीला मैदान जिसकी अधिकतम क्षमता लगभग साठ हजार की है वह भर ही नहीं पाया। यही वजह है कि भाजपा नेता इस महारैली को फ्लाप शो करार दे रहे हैं। बहरहाल इस महारैली में इंडी गठबंधन के सभी बड़े विपक्षी नेता शामिल हुए और एकजुटता का परिचय दिया। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव तेजस्वी यादव, फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती आदि ने एसआईआर की प्रकिया की जमकर मुखालफत की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पुरजोर मांग की।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने उद्बोधन में वही बातें दोहराई जो वे एक अर्से से कहते आ रहे हैं। उन्होंने एलान किया कि वोट चोरी रोकने के लिए विपक्ष का यह संघर्ष उस समय तक जारी रहेगा जब तक ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटा नहीं दिया जाता। इसका आशय स्पष्ट है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे को छोडऩे वाले नहीं है। वे आगे भी इस मुद्दे को लेकर सड़क की लड़ाई लड़ते रहेंगे। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने भी वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा बुलंद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा।

कुल मिलाकर सभी विपक्षी नेताओं ने जी भरकर अपनी भड़ास निकाली। उन्हें यह बात समझनी चाहिए कि इस तरह के आंदोलन प्रदर्शन से न तो एसआईआर रुकेगा न ही ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देंगें। (The Battle of the House Moves to the Streets) उन्हें सिर्फ संसद में महाभियोग प्रस्ताव पारित कर के ही हटाया जा सकता है। संसद में विपक्ष के पास इतने नंबर नहीं कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करा पाए। रही बात एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

विपक्ष को फैसले की प्रतिक्षा करनी चाहिए। माक पार्लियामेंट बनाने और रामलीला मैदान में भाषण देने से कुछ हासिल नहीं होगा। यह लड़ाई कायदे से संसद में ही लड़ी जानी चाहिए सड़क पर तमाशा करने से कुछ नहीं होगा उल्टे विपक्ष की ही किरकिरी होगी। भाजपा को विपक्ष ने अपनी खिल्ली उड़ाने का खुद ही मौका दे दिया है। भाजपा नेता रामलीला मैदान में अपेक्षाकृत कम भीड़ जुटने को लेकर कांग्रेस पर तंज कस रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस आंदोलन के नाम पर देश में अराजकता का माहौल बनाना चाहती है क्योंकि वह चुनाव में तो भाजपा को हरा नहीं पा रही है इसलिए अराजकता फैला कर सत्ता परिवर्तन करने का सपना देख रही है जिसे भाजपा कभी पूरा नहीं होने देगी। इसके लिए भाजपा कार्यकर्ता देश भर में पैदल मार्च कर कांग्रेस के नापाक मंसूबों से आम जनता को अवगत कराएंगे। लब्बोलुआब यह कि सत्ता पक्ष और विपक्ष की यह जंग आगे और जारी ही रहेगी।

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