संपादकीय: समरथ को नहीं दोष गोसाई
The Powerful Are Beyond Reproach: अपनी दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म के मामले में बीस साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम एक बार फिर बीस दिनों की पैरोल पर बाहर आ गए हैं। हमेशा की तरह इस बार भी वे जेल से अपने सिरसा स्थित डेरे तक दर्जनों गाडिय़ों के काफिले के साथ पहुंचे। राम रहीम को बार-बार पैरोल पर छोड़े जाने पर सवालिया निशान लगना स्वाभाविक है। एक ओर तो विभिन्न संगीन अपराधों के आरोप में सजा काट रहे अन्य कैदियों को पैरोल पर छूटने के लिए एडिय़ां रगडऩी पड़ती हैं लेकिन उनकी बीस साल की सजा के दौरान बीस दिन की पैरोल पर रिहाई नहीं मिल पाती, वहीं दूसरी ओर हरियाणा के रोहतक जेल में बंद राम रहीम जब चाहें तब पैरोल पर रिहा हो जाते हैं।
इसी साल उन्हें तीसरी बार पैरोल पर छोड़ा गया है। जब से उन्हें सजा सुनाई गई है तब से आज तक उन्हें बीते छह सालों में सत्रहवीं बार पैरोल पर छोड़ा गया है। हर बार उन्हें बीस से चालीस दिनों तक के लिए पैरोल पर छोड़ा जाता है। अब तक वे तीन सौ से ज्यादा दिनों तक पैरोल पर बाहर रह चुके हैं। संभवत: वे ऐसे एकमात्र कैदी हैं जिन्हें छह साल की अवधि के भीतर लगभग एक साल तक जेल से बाहर खुली हवा में सांस लेने का अवसर मिला है।
इससे यह पंक्तियाँ सही साबित होती हैं कि—समरथ को नहीं दोष गोसाई। कोई बड़ी बात नहीं कि जेल में भी उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट मिलती हो। बार-बार उनकी पैरोल पर रिहाई से स्पष्ट है कि जेल प्रशासन और सरकार उन पर मेहरबान है और मेहरबानी की कीमत भी वसूली जा रही हो। देश की जेलों का हाल सर्वविदित है जहाँ पैसा फेंको तमाशा देखो का खुला खेल बेरोकटोक चलता है। यहाँ तक कि जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर जेल में रहते हुए भी अपना गैंग चलाते हैं।
ऐसे में राम रहीम को उनकी मर्जी के मुताबिक बार-बार पैरोल पर छूटने में कोई दिक्कत आने का सवाल ही पैदा नहीं होता। सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का वाली बात है। किन्तु इस पर सवाल तो उठेंगे। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और अन्य संगठनों ने राम रहीम की बार-बार पैरोल पर रिहाई की कड़ी निंदा की है और उन्हें दी जा रही इस राहत पर सवाल खड़े किए हैं। अभी तो राम रहीम को और चौदह साल की सजा काटनी है। जाहिर है आगे भी वे पैरोल पर छूटते रहेंगे। इस बारे में सरकार की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।



