Semicon India 2026: सेमीकंडक्टर का नया ग्लोबल हब बनेगा भारत, चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम: पीएम मोदी

Semicon India 2026:-13.5 अरब डॉलर से सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा फेज शुरू
मोहाली और सूरत में कमर्शियल प्रोडक्शन का आगाज
नई दिल्ली । विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ (Semicon India 2026) के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत अब चिप डिजाइनिंग और टेस्टिंग से आगे बढ़कर कमर्शियल प्रोडक्शन के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने घोषणा की कि मोहाली और सूरत में स्थापित दो नए प्लांट्स में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो गया है, जिससे भारत में बनी चिप्स अब वैश्विक स्तर पर ग्राहकों तक पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी की आधुनिक तकनीक और भारत की सदियों पुरानी निर्माण परंपरा मिलकर विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध कर रही हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बावजूद भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है और 35 वर्षों के बाद अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने देश की सॉवरेन रेटिंग में सुधार किया है।
सेमीकंडक्टर मिशन-2: 13.5 अरब डॉलर का नया रोडमैप
पीएम मोदी ने बताया कि पहले चरण (8 अरब डॉलर) की सफलता के बाद सरकार ने 13.5 अरब डॉलर के परिव्यय के साथ सेमीकंडक्टर मिशन (Semicon India 2026) का दूसरा चरण शुरू किया है। इस नीतिगत सुधार के तहत अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय स्टार्टअप्स, घरेलू डिजाइन फर्मों और ओसीआई-स्वामित्व वाली कंपनियों के साथ सीधे साझेदारी कर सकेंगी। देश में अब तक 12 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है और केमिकल, गैस व मैटेरियल सेक्टर से जुड़े निवेशकों के लिए भी बड़ा इकोसिस्टम तैयार किया गया है।
1 लाख युवाओं को स्किलिंग, 70 हजार तैयार
भारत के विशाल इंजीनियरिंग (Semicon India 2026) टैलेंट पूल को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार 1 लाख युवाओं को सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए प्रशिक्षित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इनमें से 70 हजार से अधिक युवाओं की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। उन्होंने कैंपस में छात्रों द्वारा खुद डिजाइन की गई चिप्स भेंट किए जाने का उल्लेख करते हुए उद्योग जगत से अपील की कि वे भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट का नेतृत्व करें।
एआई युग में भारत भरोसेमंद ग्लोबल पार्टनर
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण चिप्स की वैश्विक मांग 20′ से अधिक की दर से बढ़ रही है। इससे पैदा हुई हीट मैनेजमेंट, पावर और डेटा ट्रांसफर जैसी तकनीकी चुनौतियों का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि दुनिया आज सुरक्षित और भरोसेमंद विनिर्माण ठिकानों की तलाश में है। इसके लिए देश में सौर ऊर्जा क्षमता को 2 से बढ़ाकर 160 गीगावॉट किया गया है और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स पर भी काम चल रहा है। आज जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन का शस्त्रीकरण (वेपनाइजेशन) हो रहा है, तब लोकतांत्रिक मूल्यों वाला भारत दुनिया को एक स्थिर और विश्वसनीय विकल्प प्रदान कर रहा है।



