The Plight of Delhi’s Traders: दिल्ली के व्यापारियों का दर्द

देश की राजधानी नई दिल्ली के व्यापारियों (The Plight of Delhi’s Traders) ने सरकार को एक आवेदन देकर अपना दर्द बयां किया है। पिछले एक माह से चल रहे धरना, प्रदर्शन और आंदोलन से त्रस्त होकर उन्होंने सरकार से गुजारिश की है कि जंतर मंतर की तरह ही रामलीला मैदान में भी धरना प्रदर्शन को प्रतिबंधित किया जाए और इसके लिए अन्य किसी जगह पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। अन्यथा वे अपने व्यापारिक संस्थानों में ताला लगाकर सरकार को चाबी सौंप देंगे।
नई दिल्ली में व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन सीटीआई ने कहा है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की महारैली के कारण दीपावली के पूर्व पड़े आखिरी रविवार को व्यापारियों को अपनी दुकानें बंद रखनी पड़ी। दिल्ली की लगभग ढाई लाख दुकानें बंद रही जिससे ग्यारह हजार करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ। हालाकि सरकार ने व्यापारियों को भरोसा दिलाया था कि उनकी सुरक्षा की जाएगी लेकिन व्यापारियों ने खतरा नहीं उठाया और अपनी दुकानें बंद रखी। उन्हें पहले ही बार बार के आंदोलन से भारी नुकसान उठाना पड़ गया है ऐसे में 1 नवंबर की महारैली के दौरान यदि बवाल हो जाता तो अराजक तत्व दुकानों में लूटपाट और तोडफ़ोड़ कर सकते थे।
सीटीआई के मुताबिक उस दिन नई दिल्ली का 80 प्रतिशत कारोबार ठप रहा। गौरतलब है कि सीटीआई ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया था कि वे इस महारैली को स्थगित कर दें और दीपावली के बाद किसी भी दिन रैली करें लेकिन कांग्रेस ने उनके अनुरोध को ठुकरा दिया। व्यापारियों ने राहुल गांधी से चर्चा के लिए समय मांगा तो इसके लिए भी राहुल गांधी तैयार नहीं हुए। नतीजतन व्यापारियों ने 1 नवंबर को अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे।
व्यापारियों को यह डर भी सता रहा है कि विपक्षी पार्टियां आगे भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नई दिल्ली में फिर आंदोलन छेड़ सकती हैं। विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा भी है कि वे वोट चोरी रोकने के लिए सड़क की लड़ाई जारी रखेंगे और तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा जब तक एसआईआर की प्रक्रिया पर रोक नहीं लग जाती और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटा नहीं दिया जाता। ऐसे में अपने व्यवसाय को लेकर व्यापारियों की चिंता स्वाभाविक है।
खासतौर पर तब जब यूरोपीय देशों में आंदोलन के नाम पर अराजकता की आग फैल रही है और इसके निशाने पर व्यवसायिक संस्थान ही आ रहे जिसमें न सिर्फ लूटपाट हो रही है बल्कि उसमें तोड़ फोड़ कर आगजनी भी की जा रही है। भारत मे भी अराजकता फैलाने की अंतराष्ट्रीय साजिश रची जा रही है और कुछ अराजक तत्व और दिमागी नक्सली इन विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं। ऐसी स्थिति में नई दिल्ली के व्यस्तम इलाकों जंतर मंतर और रामलीला मैदान किसी भी तरह के आंदोलन के लिए कतई उचित नहीं है क्योंकि इसके आसपास ही बड़े व्यापारिक संस्थान हैं। यहां आंदोलन होने का सीधा प्रभाव व्यापार पर पड़ता है।
काकरोचों के आंदोलन के बाद जंतर मंतर पर जो अराजकता की स्थिति बनी थी उसे मद्देनजर रखकर सरकार ने जंतर मंतर पर आंदोलन प्रतिबंधित कर दिया है। अब नई दिल्ली के व्यापारियों की मांग है कि जंतर मंतर की तरह रामलीला मैदान में भी आंदोलन प्रतिबंधित किया जाए ताकि ऐसे आंदोलनों से उनका व्यवसाय प्रभावित न हो। देखना होगा कि सरकार व्यापारियों की पीड़ा को समझते हुए इस बारे में क्या फैसला लेती है?



