छत्तीसगढ़

Tribal Rights Rally in Mainpat: मैनपाट में आदिवासियों की अधिकार रैली से गूंजे विरोध के नारे, भू-माफियाओं पर कार्रवाई की मांग

  • Tribal Rights Rally in Mainpat:कमलेश्वरपुर में सैकड़ों आदिवासियों ने किया प्रदर्शन
  • कलेक्टर ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का दिया भरोसा

अम्बिकापुर/नवप्रदेेश। मैनपाट में आदिवासियों की जमीन (Tribal Rights Rally in Mainpat) पर कथित अवैध कब्जे, फर्जी दस्तावेजों और जमीन की हेराफेरी का मामला अब जोर पकड़ने लगा है। आदिवासियों के जमीन संबंधी अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर मंगलवार को कमलेश्वरपुर में विशाल अधिकार रैली और धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान भू-माफियाओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। वहीं, स्थानीय सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के खिलाफ भी प्रदर्शनकारियों ने मुर्दाबाद के नारे लगाए।

आदिवासियों की जमीन हड़पने और फर्जी रजिस्ट्री के आरोप

मैनपाट क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन (Rights Rally) की खरीद-बिक्री और कथित अवैध कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद सामने आते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा आदिवासियों की जमीन के दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर फर्जी तरीके से जमीन अपने नाम कराई गई है। इसके अलावा सरकारी जमीन के दस्तावेजों में भी कथित हेराफेरी कर कब्जा करने और बाद में उसे बेचकर आर्थिक लाभ कमाने के आरोप लगाए गए हैं। मैनपाट में मांझी, कोरवा, उरांव और कंवर सहित कई आदिवासी समुदाय निवास करते हैं। पर्यटन और बॉक्साइट खनन के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में जमीन और मुआवजे से जुड़े विवाद भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। अब आदिवासी संगठनों ने इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।

सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में निकली अधिकार रैली

सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित इस अधिकार रैली (Tribal Rights Rally in Mainpat) में सरगुजा संभाग के आदिवासी पदाधिकारी और मैनपाट क्षेत्र के प्रभावित परिवार बड़ी संख्या में शामिल हुए। कमलेश्वरपुर बस स्टैंड के समीप धरना देकर प्रदर्शनकारियों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। प्रदर्शन के दौरान जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने विधायक रामकुमार टोप्पो और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सवाल उठाया कि आदिवासियों की जमीन और उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मामले लंबे समय से लंबित क्यों हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की।

100 से अधिक रजिस्ट्रियों में एक ही व्यक्ति के गवाह होने का दावा

प्रदर्शन (Tribal Rights Rally in Mainpat) के दौरान सरगुजा बचाओ संघर्ष समिति के एक पदाधिकारी ने मैनपाट में जमीन की रजिस्ट्री को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में हुई 100 से अधिक जमीन रजिस्ट्रियों में एक ही व्यक्ति को गवाह बनाया गया है। समिति ने सवाल किया कि अलग-अलग जमीनों की इतनी बड़ी संख्या में हुई रजिस्ट्रियों में एक ही व्यक्ति का गवाह होना संदेह पैदा करता है।समिति का आरोप है कि आदिवासियों और सरकारी जमीनों से संबंधित दस्तावेजों में कथित कूटरचना कर जमीनों की हेराफेरी की गई है। संगठन ने सभी संदिग्ध रजिस्ट्रियों की बारीकी से जांच कराने तथा इस पूरे मामले में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है।

कलेक्टर ने जांच और दोषियों पर कार्रवाई का दिया भरोसा

मामले को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा कलेक्टर ने जमीन की हेराफेरी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी से जमीन अपने नाम कराने और अवैध तरीके से जमीन बेचने से जुड़े आरोपों की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

विधायक की भूमिका पर भी उठे सवाल

मैनपाट में आदिवासियों की जमीन से जुड़े विवाद को लेकर प्रदर्शनकारियों ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की भूमिका पर भी सवाल उठाए। लोगों ने जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही तय करने और आदिवासी परिवारों के हितों की रक्षा के लिए ठोस पहल करने की मांग की।फिलहाल कमलेश्वरपुर में हुई इस अधिकार रैली (Tribal Rights Rally in Mainpat) ने मैनपाट के जमीन विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। देखना होगा कि संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आदिवासियों की जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में किन लोगों पर कार्रवाई होती है।

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