छत्तीसगढ़

Political Platform: मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने सजा सियासी मंच, श्रद्धालुओं और छोटे व्यापारियों की बढ़ेगी मुश्किल!

दो दिनों तक प्रभावित हुई दर्शन व्यवस्था और बाजार की रौनक, दीपावली पर रोजी-रोटी की चिंता

अनिल सामंत

जगदलपुर/नव प्रदेश। बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी का मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं,बल्कि शहर की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है। लेकिन मंदिर के सामने राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन (Political Platform) लेकर अब जनसुविधा और धार्मिक मर्यादा से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के लिए शहर में अन्य स्थान उपलब्ध होने के बावजूद मंदिर के सामने ही कार्यक्रम आयोजित किए जाने से श्रद्धालुओं,पर्यटकों और छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ने से परेशान रहे।दो दिनों तक कार्यक्रम और भीड़ के कारण मंदिर तक पहुंचने का रास्ता तथा आसपास का कारोबार प्रभावित हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

मां दंतेश्वरी मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बाहर से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की भी यहां आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में मंदिर के सामने बड़े राजनीतिक आयोजन (Political Platform) से रास्तों, आवागमन और दर्शन व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका स्वाभाविक है। सवाल यह भी है कि क्या धार्मिक स्थलों के आसपास राजनीतिक गतिविधियों के आयोजन के लिए कोई स्पष्ट नीति है? यदि भाजपा को इस स्थान पर कार्यक्रम की अनुमति मिलती है तो कांग्रेस अथवा अन्य राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को भी क्या इसी आधार पर अनुमति दी जाएगी? सार्वजनिक स्थलों के उपयोग में समान नियम और समान अवसर सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

इस आयोजन का दूसरा पहलू (Political Platform) उन छोटे व्यापारियों से जुड़ा है, जिनकी आजीविका मंदिर परिसर के आसपास के कारोबार पर निर्भर है। दीपावली के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों से कई व्यापारी मिट्टी के दीये, पूजा सामग्री और पारंपरिक सामान लेकर शहर पहुंचते हैं। त्योहार के इन दिनों में ही उनकी बिक्री की उम्मीद सबसे अधिक रहती है। ऐसे समय में यदि दो से तीन दिनों तक भीड़, यातायात प्रतिबंध अथवा रास्तों में अवरोध के कारण दुकानदारी प्रभावित होती है तो इन छोटे कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सवाल है कि त्योहार के ऐन मौके पर उनकी आजीविका प्रभावित होने की स्थिति में उनकी परेशानी कौन सुनेगा?

प्रशासन से जवाब मांगते पांच सवाल

क्या धार्मिक स्थलों के सामने राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन (Political Platform) के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं? क्या सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों पर समान नियम लागू होंगे? श्रद्धालुओं और पर्यटकों के निर्बाध आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग तथा दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है? दीपावली के दौरान छोटे व्यापारियों के कारोबार को बचाने के लिए क्या व्यवस्था की गई है? क्या राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए मंदिर परिसर से अलग कोई उपयुक्त स्थल निर्धारित नहीं किया जा सकता?

राजनीति अपनी जगह,जनसुविधा और आस्था अपनी जगह

यह सवाल किसी राजनीतिक दल के विरोध या समर्थन का नहीं, बल्कि शहर की धार्मिक पहचान,आम नागरिकों की सुविधा और छोटे व्यापारियों की आजीविका का है। राजनीतिक आयोजन लोकतांत्रिक गतिविधियों का हिस्सा हैं, लेकिन उनके कारण श्रद्धालुओं को दर्शन में परेशानी और छोटे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान न हो,यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है। प्रशासन को आयोजन से पहले यातायात,दर्शन और बाजार की व्यवस्था स्पष्ट करनी चाहिए। आखिर मां दंतेश्वरी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उसकी धार्मिक गरिमा और आम जनता की सुविधा का ध्यान रखते हुए राजनीतिक आयोजनों के लिए उपयुक्त स्थान और व्यवस्था तय करना समय की मांग है।

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