संपादकीय

Negligence towards CM Helpline : सीएम हेल्पलाइन के प्रति लापरवाही चिंतनीय

छत्तीसगढ़ में आम जनता की समस्याओं का समाधान करने और उनकी शिकायतों का निर्धारित समयावधि के भीतर निराकरण करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने सीएम हेल्पलाइन (Negligence towards CM Helpline) सेवा शुरू की है। जिससे लाखों लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है। साय सरकार की इस पहल की सराहना भी हो रही है लेकिन नगरीय निकायों के आयुक्त और मुख्य नगरपालिका अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जो चिंता का विषय है। पानी, साफ सफाई, सड़क नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं लोगों को सुलभ कराना नगरीय निकायों की ही जिम्मेदारी होती है और वे इसके निर्वहन में विफल रहते हैं।

इसे लेकर आम जनता जब सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराती है तो उसे गंभीरता से लेने की जगह संबंधित अधिकारी विशेष क्लोज कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। इससे लोगों में शासन प्रशासन के प्रति विश्वास घटता है। बहरहाल अब इसे सरकार ने गंभीरता से लिया है और नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को पत्र प्रेषित कर कड़ी चेतावनी दी है कि यदि नगरीय निकायों से संबंधित जनता की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और प्रकरण का निराकरण किए बगैर विशेष क्लोज कर दिया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाई की जाएगी।

वास्तव में नगरीय निकायों में अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और लापरवाही करने वाले अफसरों के खिलाफ (Negligence towards CM Helpline) कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। आज तो आलम यह है कि साय सरकार लोगों को मूलभूत सुविधाएं सुलभ कराने नगरीय निकायों को भरपूर पैसे दे रही है लेकिन वे उसे खर्च नहीं कर पा रहे हैं। तीन साल में अधोसंरचना विकास के लिए 2690 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें से नगरीय निकायों को 566 करोड़ रुपये दिए गए लेकिन सिर्फ 56 करोड़ ही खर्च हुए। अनेक स्वीकृत कार्य शुरू ही नहीं हुए। इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर भी उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

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