संपादकीय

Another sever blow to the congress: संपादकीय: कांग्रेस को एक और करारा झटका

देश के आधा दर्जन बड़े प्रदेशों में विधान परिषद भी है। इनमें से चार राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र विधान परिषद की 28 सीटों के लिए बैलेट पेपर से मतदान कराया गया। फिर भी कांग्रेस का कहीं खाता भी नहीं खुला। जबकि भाजपा ने 28 में से 20 सीटों पर अपनी जीत का परचम फहराया। 8 सीटों पर समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, एनसीपी शरद पवार गुट और जन सुराज पार्टी के खाते में गई जबकि देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के हिस्से में शून्य बटे सन्नाटा आया। कर्नाटक में कांग्रेस ( Another severe blow to the Congress) की सरकार है। वहां एसआईआर को लेकर भी कोई विवाद नहीं है।

उपर से विधान परिषद का चुनाव कांग्रेस की मंशा और मांग के अनुरूप बैलेटपेपर से कराया गया फिर भी वहां की चारों सीटों पर कांग्रेस को शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा। जो कांग्रेस के लिए करारा झटका है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े कर्नाटक के ही हैं। उनके बेटे कर्नाटक सरकार में मंत्री हैं। फिर भी वहां की चारों सीटों पर कांग्रेस चारों खाने चित हो गई। अब कांग्रेस कर्नाटक में भला किस मुँह से वोट चोरी का आरोप लगाएगी जो हर चुनाव में अपनी हार के बाद वोट चोरी का ढिंढोरा पीटती है और चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान की मांग को लेकर आंदोलित है और इस मुद्दे को लेकर 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली करने जा रही है।

कर्नाटक में कांग्रेस की करारी शिकस्त पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तंज कसा है कि कर्नाटक में बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस को कितनी सीटें मिली है? उन्होंने ट्वीट किया है कि चुनाव चाहे ईवीएम से हो या बैलेट पेपर से कांग्रेस जीत ही नहीं सकती। सही बात है। कांग्रेस को चिंतन करना चाहिए कि वह चुनाव दर चुनाव हार क्यों रही है? विभिन्न प्रदेशों के नगरीय निकाय चुनाव जो बैलेट पेपर से कराए गए उसमें भी कांग्रेस को पराजय का ही मु़ंह देखना पड़ा है।

एमएलसी चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 11 में से 6 सीटें जीतकर भले ही अपना प्रदर्शन बरकरार रखा हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र बनारस से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ने पिछले चुनाव के मुकाबले भारी मतों के क़तर से जीत दर्ज कर भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। बिहार में नवगठित जन सुराज पार्टी ने एक सीट जीतकर अपनी बढ़ती ताकत का अहसास करा दिया है। जो भाजपा के लिए चिंता का सबब तो है ही राष्ट्रीय जनता दल के लिए भी खतरे की घंटी है।

महाराष्ट्र में एनसीपी शरद पवार गुट ने साबित कर दिया है कि टूटने के बावजूद उस पार्टी का जनाधार कमजोर नहीं हुआ है। भाजपा ने सबसे ज्यादा सीटों पर किला फतह करने के बावजूद जिन सीटों पर उसे हार मिली है उसकी गहन समीक्षा करने का फैसला लिया है। कांग्रेस को भी अपनी स्थिति की समीक्षा करना चाहिए और पार्टी का जनाधार मजबूत करने की दिशा में कारगर कदम उठाने चाहिए। अन्यथा आने वाले समय में उसे इसी तरह झटके पर झटके लगते रहेंगे।

Related Articles

Back to top button