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Religious Conversion: वनांचल में धर्मांतरण के जाल पर कड़ा प्रहार

विधायक भावना बोहरा एवं समाज प्रमुखों के प्रयासों से 61 लोगों की मूल धर्म में हुई घर वापसी

जितेन्द्र नामदेव

कवर्धा/नवप्रदेश। पंडरिया विधानसभा के वनांचल क्षेत्रों में (A severe blow to religious conversion) अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता की दिशा में पंडरिया विधायक भावना बोहरा एवं आदिवासी और बैगा समाज के प्रमुखों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में वनांचल ग्राम महिडबरा में आयोजित संस्कृति गौरव सम्मलेन एवं अभिनंदन समारोह में विधायक भावना बोहरा एवं समाज प्रमुखों के सामूहिक प्रयासों से क्षेत्र के 10 गांवों के 61 लोगों की मूल धर्म में घर वापसी कर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ें। इनमें कुशियारी, कारीढाप(बदना), कौआनार (बदना), खैरापारा (कुशियारी), घोघराखुर्द, सजनखार, छिरहा, परेवाछापर, छिरहा एवं नवापारा के लोग शामिल हैं। पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विधायक भावना बोहरा और छत्तीसगढ़ बैगा समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री इतवारी राम मछिया जी, प्रदेश सलाहकार बैग समाज श्री गौठु राम बैगा जी, जिला अध्यक्ष बैगा समाज श्री सोनसाय बैगा जी, समाज पुजारी श्री गणेश टेकाम जी, संरक्षक आदिवासी समाज श्री तनगु आर्मो जी सहित आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने उनका अभिनंदन एवं स्वागत कर उनके पैर पखारकर उनके मूल धर्म में वापसी कराया। वनांचल क्षेत्रों में आदिवासी एवं बैगा समाज के लोगों द्वारा लगातार सामाजिक बैठकें और संवाद आयोजित किए जा रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य समाज के लोगों को अपनी मूल धार्मिक आस्था, रीति-रिवाजों, परंपराओं, संस्कृति और पूर्वजों की विरासत के प्रति जागरूक करना है। उन्हें अपनी मूल आस्था और पारंपरिक सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान से पुनः जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी सामाजिक जागरूकता और सामूहिक संवाद के परिणामस्वरूप 61 लोगों ने अपनी इच्छा से मूल धर्म में वापसी की।

इस अवसर पर विधायक भावना बोहरा ने कहा कि आदिवासी और बैगा समाज (A severe blow to religious conversion) हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक हैं। उनकी अपनी विशिष्ट पहचान, पूजा पद्धति, रीति-रिवाज और जीवनशैली है, जिसे पीढ़ियों से हमारे पूर्वजों ने संजोकर रखा है। हमारी जिम्मेदारी है कि इस विरासत, आस्था और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण हो तथा आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों और परंपराओं से परिचित रहें। वनांचल के गांवों में आदिवासी और बैगा समाज के प्रमुखों द्वारा लगातार बैठकें कर समाज को जागरूक करने और लोगों से संवाद स्थापित करने का जो प्रयास किया जा रहा है, वह सामाजिक एकजुटता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आज 10 गांवों के 61 लोगों का अपनी मूल धार्मिक आस्था से पुनः जुड़ना समाज के सामूहिक प्रयासों और जागरूकता का परिणाम है। वर्षों से वनांचल क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से धर्मांतरण का प्रयास किया गया, जिससे आदिवासी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने का काम हुआ। लेकिन अब समाज जागरूक हो रहा है और अपनी संस्कृति एवं मूल आस्था की ओर लौट रहा है। हमारी जनजातीय संस्कृति केवल हमारी पहचान ही नहीं, बल्कि हमारी अमूल्य धरोहर है। आदिवासी और बैगा समाज की परंपराओं, देवी-देवताओं, पूजा पद्धतियों, लोककला और रीति-रिवाजों को संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं और मातृशक्ति को आगे आकर अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। हमारा उद्देश्य समाज में जागरूकता, समरसता और अपनी जड़ों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की डबल इंजन भाजपा सरकार जनजातीय समाज के सम्मान, अधिकारों, उत्थान और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। भगवान बिरसा मुंडा जी की गौरवशाली विरासत से लेकर जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण तक, सरकार जनजातीय गौरव और स्वाभिमान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। हमारा भी संकल्प है कि पंडरिया विधानसभा के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी एवं बैगा समाज के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान एवं परंपराओं को संरक्षित करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। सड़क,बिजली,पानी जैसी मुलभुत सुविधाएँ और विकास अब वनांचल ग्रामों तक पहुँच रही है। नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ अब हमारे वनांचल क्षेत्रों में विकास का नया दौर लेकर आया है, जहाँ सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से शासन-प्रशासन अब सीधे उनके घरों और गाँव तक पहुँच रही है, उनकी समस्याओं को सुन रही है और सुविधाओं का विस्तार कर रही है।

विधायक भावना बोहरा ने इस सामाजिक पहल के लिए आदिवासी एवं बैगा समाज (A severe blow to religious conversion) के वरिष्ठजनों, समाज प्रमुखों और ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज की एकता, जागरूकता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। विगत 3 महीनों से आदिवासी व बैगा समाज एवं सर्व समाज द्वारा आपसी संवाद व प्रयासों के माध्यम से धर्मांतरण करने वाले समाज के लोगों को जागरूक किया और उन्हें पुनः अपने मूल धर्म में प्रवेश करने के लिए प्रेरित किया जिसके परिणाम स्वरूप आज 61 लोगों ने घर वापसी की है। हम सब मिलकर अपनी परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। आज वनांचल क्षेत्र का आदिवासी समाज पुनः अपनी संस्कृति और परंपरा की ओर लौट रहा है, यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सकारात्मक संदेश है। वर्तमान में वनांचल क्षेत्रों में विकास की रोशनी पहुँचने से यहाँ निवासरत जनजाति परिवार के लोगों में उम्मीद की नई किरण जागी है और अब वे किसी प्रलोभन या भ्रम में नहीं आ रहे, बल्कि अपनी संस्कृति और आस्था के संरक्षण के लिए स्वयं आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में भी पंडरिया विधानसभा में सांस्कृतिक पुनर्जागरण, धार्मिक जनजागरण और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का अभियान निरंतर जारी रहेगा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ बैगा समाज के प्रदेश अध्यक्ष इतवारी राम मछिया, प्रदेश सलाहकार बैग समाज गौठु राम बैगा, जिला अध्यक्ष बैगा समाज सोनसाय बैगा, समाज पुजारी गणेश टेकाम, संरक्षक आदिवासी समाज तनगु आर्मो , पूर्व अध्यक्ष आदिवासी समाज शोभित धुर्वे, अध्यक्ष यादव समाज ग्रामीण फिरतु यादव, जयसिंह यादव, महेश धुर्वे जी, समाज प्रमुख एवं उपाध्यक्ष परस यादव जी, धोबा समाज प्रमुख श्री रतिराम भट्ट जी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री सुमीर पुसाम जी, सरपंच एवं महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष श्रीमती पार्वती सुनहले जी, अध्यक्ष विकासखंड बैगा समाज श्री लालजु बैगा जी, नगर समाज प्रमुख श्री पंचराम धुर्वे जी, महामंत्री बैगा समाज श्री चतुर बैगा जी, श्री प्रेम टेकाम जी सहित, सर्व समाज के वरिष्ठजन, सदस्यगण, भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि सहित क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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