छत्तीसगढ़

Plastic Waste Management : कचरे से कंचन बना रहा छत्तीसगढ़ का यह गांव, महिलाओं को मिल रहा बंपर रोजगार

छत्तीसगढ़ का एक छोटा सा गांव आज पूरे देश के ग्रामीण इलाकों के लिए स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की एक नई नजीर पेश कर रहा है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड अंबागढ़ चौकी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कौड़ूटोला आज प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (Plastic Waste Management) का एक बेहद सफल और आदर्श माडल बनकर उभरा है। यहाँ स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट न केवल पर्यावरण को प्लास्टिक के जहर से बचा रही है, बल्कि गांव की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका को भी एक नई व मजबूत दिशा दे रही है।

हाल ही में जिले की कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने खुद इस यूनिट का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने यहां की आधुनिक कार्यप्रणाली को देखने के बाद ग्रामीणों के इस नवाचार और सामुदायिक सहभागिता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग की यह व्यवस्थित प्रक्रिया पर्यावरण संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

वैज्ञानिक ढंग से हो रहा प्रसंस्करण, कचरा बना कीमती संसाधन

कौड़ूटोला में स्थापित इस यूनिट में आधुनिक मशीनों की मदद से प्लास्टिक कचरे का पूरी तरह से वैज्ञानिक और तकनीकी ढंग से निपटारा किया जा रहा है। जिले के अलग-अलग गांवों में बने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्रों तथा स्थानीय कबाड़ विक्रेताओं से प्लास्टिक कचरा यहाँ एकत्रित किया जाता है। इसके बाद मशीनों के जरिए प्लास्टिक की खाली बोतलों की बेलिंग (कंप्रेस करना) की जाती है, और कड़े व बेकार हो चुके हार्ड प्लास्टिक को पिघलाकर छोटे-छोटे दाने (ग्रैन्यूल्स) तैयार किए जाते हैं। इन दानों को बाद में फैक्ट्रियों को नई प्लास्टिक वस्तुएं बनाने के लिए बेच दिया जाता है। इस तरह जो कचरा कभी जमीन को बंजर बना रहा था, वह अब एक कीमती संसाधन में बदल चुका है।

जय मां दंतेश्वरी समूह की महिलाओं ने संभाली कमान

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी और खूबसूरत सफलता यह है कि इस पूरी यूनिट का संचालन ग्राम पंचायत सोनसायटोला की ‘जय मां दंतेश्वरी स्व-सहायता समूह’ की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। गांव की ये साधारण महिलाएं आज खुद आधुनिक मशीनें चला रही हैं। समूह की महिलाएं न केवल कचरे का प्रबंधन कर रही हैं, बल्कि वे ग्रामीणों और कबाड़ बेचने वालों से उचित मूल्य पर प्लास्टिक कचरा खरीदती हैं, जिससे गांव के अन्य परिवारों को भी घर बैठे अतिरिक्त आय (कमाई) का जरिया मिल गया है।

स्वच्छ भारत मिशन को धरातल पर उतारा

कौड़ूटोला का यह अनूठा मॉडल केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के सपनों को सच में धरातल पर साकार कर रहा है। प्लास्टिक जैसी गंभीर समस्या से निपटने के साथ-साथ यह मॉडल पर्यावरण को स्वच्छ रखने, पुराने संसाधनों को दोबारा उपयोग में लाने और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। प्रशासन के मुताबिक, कौड़ूटोला की यह अनूठी पहल अब जिले की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक बेहतरीन प्रेरणास्रोत बन चुकी है। इस सफल प्रयोग को देखने के बाद अब अन्य गांवों में भी इसी तरह के आत्मनिर्भर और हरित माडल (Green Model) तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।

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