
Nepal Political Reforms: नेपाल के पूर्व वित्तमंत्री बोले—रोजगार, उत्पादन और निवेश बढ़ाना जरूरी; सरकार के हर वादे और बजट खर्च का जनता को मिले हिसाब
कुमार अभिनव
काठमांडू/नवप्रदेश। नेपाल की अर्थव्यवस्था में संभावनाओं की कमी नहीं है, लेकिन इन्हें रोजगार और आम लोगों की आय (Nepal Political Reforms) में बदलना बड़ी चुनौती बनी हुई है। जलविद्युत, पर्यटन, कृषि और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विकास की व्यापक संभावनाओं के बावजूद बेरोजगारी, युवाओं का विदेश पलायन, आयात पर निर्भरता और निवेश की कमी जैसे सवाल नेपाल के सामने खड़े हैं। विदेशों में काम करने वाले नेपाली श्रमिकों की कमाई देश की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है, जबकि घरेलू उद्योग, उत्पादन और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। नेपाल के पूर्व वित्त मंत्री सुरेन्द्र पाण्डेय का मानना है कि केवल राजनीतिक बहुमत या सरकार बदलने से विकास नहीं होता। असली सवाल यह है कि सरकारी नीतियों और बजट का लाभ आम नागरिक तक कितना पहुंच रहा है।
लोकतंत्र में सरकार के कामकाज का मूल्यांकन और जनता के प्रति जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। इसी सोच के साथ नेपाल (Nepal Political Reforms) में प्रस्तावित ‘नागरिक आवाज अभियान’ के माध्यम से सरकार की घोषणाओं, आर्थिक नीतियों और वास्तविक उपलब्धियों पर सवाल उठाने की तैयारी है। राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक नवप्रदेश से खास बातचीत में पूर्व वित्तमंत्री सुरेन्द्र पाण्डेय ने नेपाल की आर्थिक चुनौतियों, राजनीतिक बदलाव, भ्रष्टाचार, भारत-नेपाल संबंधों, जलवायु परिवर्तन और नागरिक आवाज अभियान की भावी कार्ययोजना पर विस्तार से अपनी बात रखी। प्रस्तुत हैं इस विशेष साक्षात्कार के प्रमुख अंश—

सवाल : नेपाल की अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
सुरेन्द्र पाण्डेय : नेपाल में जलविद्युत, पर्यटन, कृषि और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। सबसे बड़ी चुनौती इन संभावनाओं को उत्पादन और रोजगार में बदलना है। आर्थिक विकास का लाभ सामान्य नागरिक तक पहुंचना चाहिए। किसानों को उपज का उचित मूल्य, युवाओं को रोजगार और छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता मिले, तभी विकास सार्थक होगा।
सवाल : राजनीतिक बहुमत के बावजूद आर्थिक संकट और जनता में निराशा क्यों बनी रहती है?
सुरेन्द्र पाण्डेय : बहुमत सरकार को फैसले लेने का अवसर देता है, लेकिन आर्थिक उपलब्धियों की गारंटी नहीं होता। सरकार की सफलता उसके काम के परिणाम से तय होती है। बजट कितना खर्च हुआ, कितने रोजगार मिले और सार्वजनिक सेवाओं में कितना सुधार आया, इसका नियमित मूल्यांकन होना चाहिए।
सवाल : क्या विदेशों से आने वाली कमाई पर नेपाल की निर्भरता बढऩा चिंता का विषय है?
सुरेन्द्र पाण्डेय : विदेशों में काम करने वाले नेपाली श्रमिकों की कमाई लाखों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतें पूरी होती हैं। लेकिन लंबे समय तक इसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। विदेशों से आने वाली पूंजी का उपयोग देश के भीतर कृषि, उद्योग, पर्यटन और दूसरे उत्पादक क्षेत्रों में निवेश के लिए भी होना चाहिए।
सवाल : युवाओं का विदेश पलायन कैसे रोका जा सकता है?
सुरेन्द्र पाण्डेय : युवाओं को देश में ही सम्मानजनक रोजगार और उद्यम के अवसर देने होंगे। तकनीकी प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा, स्टार्टअप और आसान ऋण व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाला बनाना होगा।
सवाल : भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए सबसे जरूरी कदम क्या है?
सुरेन्द्र पाण्डेय : सरकारी खरीद, निर्माण कार्यों और बजट खर्च में पारदर्शिता जरूरी है। सरकार को बताना चाहिए कि किस योजना के लिए कितनी राशि दी गई, कितना खर्च हुआ और जनता को क्या लाभ मिला। भ्रष्टाचार के मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरोपों के बजाय प्रमाण और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाए जाने चाहिए।
सवाल : ‘नागरिक आवाज़ अभियान’ शुरू करने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
सुरेन्द्र पाण्डेय : लोकतंत्र में जनता की भूमिका केवल मतदान तक सीमित नहीं है। नागरिकों को सरकार के कामकाज पर सवाल पूछने और योजनाओं का मूल्यांकन करने का अधिकार है। अभियान का उद्देश्य सरकार के अच्छे कार्यों का समर्थन करना और कमियों को तथ्यों के आधार पर सामने लाना है। यह किसी एक सरकार या दल के विरोध तक सीमित नहीं होना चाहिए।
सवाल : क्या यह अभियान भविष्य में राजनीतिक दल बन सकता है?
सुरेन्द्र पाण्डेय : फिलहाल इसकी अवधारणा एक स्वतंत्र नागरिक पहल की है। इसका उद्देश्य चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित के मुद्दों पर सरकार और संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। भविष्य में किसी संस्थागत बदलाव का फैसला संबंधित लोगों और संगठन की निर्धारित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
सवाल : भारत और नेपाल के आर्थिक संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए?
सुरेन्द्र पाण्डेय : दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, कृषि प्रसंस्करण, औद्योगिक निवेश और पर्यटन में बड़ी संभावनाएं हैं। विशेष रूप से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर दोनों देशों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। इसके लिए बेहतर संपर्क व्यवस्था, अनुकूल नीतियां और भुगतान प्रणाली को सरल बनाना जरूरी है। संबंध आपसी सम्मान और पारस्परिक हितों पर आधारित होने चाहिए।
सवाल : जलवायु परिवर्तन के मामले में नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या मांग उठानी चाहिए?
सुरेन्द्र पाण्डेय : नेपाल जैसे पर्वतीय देश के लिए जलवायु परिवर्तन आजीविका और अर्थव्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। हिमनदों में बदलाव, बाढ़ और भूस्खलन जैसे जोखिम बढ़ती चिंता के विषय हैं। नेपाल को वैज्ञानिक प्रमाणों और प्रभावित समुदायों के अनुभवों के आधार पर जलवायु न्याय, तकनीकी सहायता और वित्तीय सहयोग की मांग करनी चाहिए।

सवाल : नई पीढ़ी नेपाल की अर्थव्यवस्था को कैसे बदल सकती है?
सुरेन्द्र पाण्डेय : डिजिटल सेवाओं, सॉफ्टवेयर, ऑनलाइन कारोबार और तकनीकी उद्यमशीलता में युवाओं के लिए अवसर हैं। इसके लिए डिजिटल शिक्षा, विश्वसनीय इंटरनेट, अंतरराष्ट्रीय भुगतान और वित्तीय सुविधाएं बेहतर बनानी होंगी। नई पीढ़ी को देश की आर्थिक प्रगति का सक्रिय भागीदार बनाना जरूरी है।
सरकार से 100 सवाल पूछने की तैयारी
प्रस्तावित नागरिक आवाज़ अभियान (Nepal Political Reforms) में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार, किसानों और श्रमिकों की समस्याओं से जुड़े सवाल नागरिकों से एकत्र करने की योजना है। इन्हें संबंधित मंत्रालयों तक पहुंचाने के साथ सरकारी जवाब का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। अभियान का जोर केवल सोशल मीडिया पर सवाल उठाने के बजाय तथ्यों के साथ समाधान प्रस्तुत करने पर रहेगा।
पहले 100 दिनों की प्रस्तावित कार्ययोजना
- पहले 15 दिन : संगठन, आचारसंहिता और स्वयंसेवकों की तैयारी।
- अगले 30 दिन : नागरिकों से सवाल और समस्याएं एकत्र करना।
- इसके बाद 30 दिन : सरकारी नीतियों और बजट का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करना।
- अंतिम 25 दिन : रिपोर्ट सार्वजनिक करना, सरकार को ज्ञापन देना और जनसंवाद आयोजित करना।
इन मुद्दों पर रहेगा अभियान का जोर
- रोजगार सृजन और युवाओं का विदेश पलायन।
- सरकारी बजट के खर्च और वास्तविक उपलब्धियों की जांच।
- भ्रष्टाचार के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि व्यवस्था में सुधार।
- सरकारी घोषणाओं का नागरिक रिपोर्ट कार्ड।
- भारत-नेपाल के बीच व्यापार, ऊर्जा और पर्यटन सहयोग।
- जलवायु आपदाओं में राहत और पुनर्वास की निगरानी।



