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Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ का कहर, 50 से अधिक लोगों की मौत; राहत-बचाव अभियान जारी

कुमार अभिनव | नेपाल।

Nepal Flood: काठमांडू: नेपाल के रसुवा-भोटेकोशी क्षेत्र में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बाढ़ के बाद सुरक्षा बलों के जवानों समेत बड़ी संख्या में लोग संपर्कविहीन बताए जा रहे हैं। इसके अलावा लांगटांग नदी जलविद्युत परियोजना और नेपाल विद्युत प्राधिकरण से जुड़े कई कर्मचारी भी संपर्क में नहीं हैं।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रारंभिक अपडेट के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में 384 पर्यटक और यात्री संपर्क से बाहर बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि संपर्क से बाहर बताए गए लोगों के बाढ़ में बहने या मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई है और उनकी स्थिति का सत्यापन जारी है। प्रारंभिक सूची में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रारंभिक अपडेट के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में 384 पर्यटक और यात्री संपर्क से बाहर बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। प्रारंभिक सूची में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

बाढ़ से 11 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है और करीब 431 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। 19 पुल और लगभग 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। रसुवा से मलखु तक 20 से अधिक झूला और मोटरेबल पुल बह गए हैं। दूरसंचार नेटवर्क और बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणालियों को भी नुकसान पहुंचा है।

नेपाल सरकार ने प्रभावित छह जिलों को आपदा संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां खोज एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारत ने नेपाल को हर संभव मदद का भरोसा दिया

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर बाढ़ में हुई जनहानि पर संवेदना व्यक्त की। मोदी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत की जनता नेपाल के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया और राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग की बात कही।

भोटेकोशी और आसपास के क्षेत्रों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। लेन्दे नदी में बने ताल के पूरी तरह नहीं खुलने के कारण भोटेकोशी-त्रिशूली क्षेत्र में अतिरिक्त बाढ़ का जोखिम बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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