स्वास्थ्य

Cancer Symptoms : शरीर में दिख रही यह छोटी सी निशानी कहीं बड़ी परेशानी का संकेत तो नहीं, जानिए कब तुरंत करानी चाहिए जांच

शरीर पर अचानक कोई छोटी या बड़ी गांठ महसूस होने पर कई लोग उसे सामान्य मानकर नजरअंदाज (Cancer Symptoms) कर देते हैं। शुरुआत में दर्द न होने की वजह से अक्सर लोग इसे गंभीर नहीं समझते, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हर नई गांठ पर ध्यान देना जरूरी होता है क्योंकि समय रहते जांच कई बड़ी बीमारियों का पता लगाने में मदद कर सकती है।

अस्पतालों में भी ऐसे कई मरीज पहुंचते हैं जो महीनों तक गांठ को मामूली समझते रहते हैं। बाद में जब उसका आकार बढ़ने लगता है या दूसरे लक्षण दिखाई देते हैं तब डॉक्टर से संपर्क किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है।

हर गांठ कैंसर का संकेत नहीं होती Cancer Symptoms

विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में बनने वाली हर गांठ कैंसर से जुड़ी नहीं होती। कई बार संक्रमण, सिस्ट, फैटी ग्रोथ या दूसरी सामान्य वजहों से भी गांठ बन सकती है। इसलिए बिना जांच के न तो घबराना चाहिए और न ही इसे पूरी तरह अनदेखा करना चाहिए। सही कारण का पता केवल चिकित्सकीय जांच से ही चलता है।

शरीर के किन हिस्सों में बन सकती है गांठ

गर्दन, सीने, बगल, कमर के जोड़ वाले हिस्से, हाथ और पैरों समेत शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ दिखाई दे सकती है। यदि कोई गांठ दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, लगातार आकार में बढ़े या उसके स्वरूप में बदलाव दिखाई दे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

अगर गांठ के साथ इनमें से कोई भी संकेत दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

बिना दर्द के भी गांठ लगातार बड़ी होती जाए।

गांठ सख्त महसूस हो और आसपास के ऊतकों से चिपकी हुई लगे।

त्वचा पर लालपन, घाव या रंग में बदलाव दिखाई दे।

लगातार बुखार आने लगे।

बिना किसी कारण वजन कम होने लगे, ज्यादा थकान रहे या रात में अत्यधिक पसीना आए।

दर्द न होना भी हो सकता है चेतावनी

बहुत से लोग मानते हैं कि दर्द न होने का मतलब कोई खतरा नहीं है, जबकि कई मामलों में शुरुआती कैंसर की गांठ बिल्कुल दर्दरहित (Cancer Symptoms) होती है। यही कारण है कि दर्द न होने पर भी किसी नई या बढ़ती हुई गांठ को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

डॉक्टर कैसे करते हैं जांच

गांठ की जांच की शुरुआत मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण से की जाती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई, ब्लड टेस्ट या बायोप्सी कराने की सलाह दी जा सकती है। बायोप्सी से यह स्पष्ट किया जाता है कि गांठ सामान्य है या कैंसर से जुड़ी हुई है।

समय पर जांच से बढ़ जाती है इलाज की संभावना

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश गांठें गंभीर नहीं होतीं, लेकिन सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है। यदि नई गांठ लंबे समय तक बनी रहे, आकार बढ़ता जाए या उसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान होने से इलाज आसान होता है और बेहतर परिणाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

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