छत्तीसगढ़

Bilaspur High Court: बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित किया तो घर से होंगे बेदखल, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा और सम्मान को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि बेटे-बेटी या बहू अपने बुजुर्ग माता-पिता को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं, तो उन्हें घर से बेदखल किया जा सकता है। हाई कोर्ट ने 93 वर्षीय महिला को प्रताड़ित करने के मामले में बेटे-बहू की याचिका खारिज करते हुए मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल और अपीलीय ट्रिब्यूनल के बेदखली आदेश को बरकरार रखा।

भरण-पोषण का मतलब सिर्फ खाना या पैसा नहीं

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 के तहत भरण-पोषण का अर्थ केवल भोजन या आर्थिक सहायता देना नहीं है। बुजुर्गों को सम्मान, गरिमा और शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना भी बच्चों की जिम्मेदारी है। यदि बुजुर्ग आर्थिक रूप से सक्षम हों, लेकिन प्रताड़ना झेल रहे हों, तब भी उन्हें कानूनी संरक्षण मिल सकता है।

93 वर्षीय मां ने बेटे-बहू पर लगाया था प्रताड़ना का आरोप

मामला बिलासपुर के मुंगेली रोड स्थित मिनोचा कॉलोनी का है। 93 वर्षीय संतोष खन्ना ने मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल में शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि उनके बड़े बेटे देवेंद्र खन्ना और बहू नीरजा खन्ना उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए बेटे-बहू को घर से बेदखल करने की मांग की थी।

ट्रिब्यूनल से लेकर हाई कोर्ट तक हारे बेटे-बहू

मामले की सुनवाई के बाद मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल ने 12 सितंबर 2024 को बेटे-बहू को मकान खाली करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ दायर अपील को कलेक्टर (अपीलीय ट्रिब्यूनल) ने भी 25 नवंबर 2024 को खारिज कर दिया। बाद में हाई कोर्ट में भी बेटे-बहू को राहत नहीं मिली।

हाई कोर्ट बोला- बुजुर्गों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने किसी संपत्ति के मालिकाना हक का फैसला नहीं दिया, बल्कि एक बुजुर्ग महिला की सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के लिए आदेश पारित किया है। अदालत ने माना कि वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है और उन्हें प्रताड़ना से बचाना कानून का उद्देश्य है।

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