संपादकीय

Breaking the Parliamentary : संसद का गतिरोध टूटना जरूरी

संसद के पिछले कई सत्रों की तरह ही मानसून भी हंगामों की भेंट चढ़ता नजर आ रह है। पिछले बीस दिनों से विपक्ष द्वारा हंगामा खड़ा करने की वजह से लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। विपक्षी पार्टियां सदन में सवाल करने की जगह सदन से संसद परसिर में बवाल कर रही हैं। यह बात अलग है कि सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण विधेयक बहुमत के आधार पर पारित करा लिये हैं। लेकिन इन विधेयकों पर भी विपक्ष ने अपनी कोई राय नहीं दी थी।

यदि इन विधेयकों पर सार्थक चर्चा हो जाती तो ये विधेयक और ज्यादा प्रभावी बन सकते थे। विपक्ष ने तो मानो यह तय कर रखा है कि सदन में हंगामा खड़ा करना ही उनका मकसद है। सबसे बड़ी बात यह कि विपक्ष के हंगामें के कारण संसद में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो पा रहा है जिसकी वजह से सांसद अपने अपने लोकसभा क्षेत्रों की समस्याएं नहीं उठा पा रहे हैं और जो नये सांसद पहली बार संसद (Breaking the Parliamentary) में पहुंचे हैं उन्हें बोलने का अवसर भी नहीं मिल पा रहा है। बहरहाल अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह संसद में जारी गतिरोध को कैसे दूर करे। क्योंकि अभी इसी सत्र में एफसीआरए संसोधन विधेयक तथा महिला आरक्षण और परीसीमन विधेयक लाया जाना है।

इसके लिए सरकार ने विपक्ष से सहयोग मांगा है। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने खुद होकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से इस बाबत् चर्चा की है और उनसे सहयोग की अपील है किन्तु राहुल गांधी जिस तरह से सरकार को घेरने में लगे हुए हैं उसे देखते हुए यह नहीं लगता कि वे इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का सहयोग करेंगे। खासतौर पर एफसीआरए संसोधन विधेयक का तो कांग्रेस द्वारा पूरजोर विरोध किये जाने की ही प्रबल संभावना है। क्योंकि इस विधेयक को रोकने के लिए मिसनरीज कांग्रेस पर दबाव बना रही है।

उन्होंने तो गृहमंत्री अमित शाह से भी इस विधेयक को संसद में पेश न करने का अनुरोध किया था। किन्तु यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो जाएगा क्योंकि दोनों ही जगह एनडीए को पूर्णबहुमत हासिल है भले ही कांग्रेस और इंडी गठबंधन इस विधेयक के खिलाफ हंगामा करे। दिक्कत तो महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर होगी। क्योंकि इसे पारित करने के लिए दोनों ही सदनों में दो तिहाई बहुमत की दरकार है।

राज्यसभा में तो एनडीए दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच चुका है वहां यह विधेयक पारित हो सकता है। किन्तु लोकसभा में एनडीए दो तिहाई बहुमत से काफी दूर है। ऐसे में यदि विपक्ष के कुछ सांसदों ने अंतर्रात्मा की आवाज के आधार पर इस विधेयक के समर्थन में वोट नहीं दिया तो यह विधेयक इस बार भी गिर सकता है।

गौरतलब है कि इस विधेयक को लेकर संसद का पिछले दिनों विशेष सत्र बुलाया गया था जिसमें दो तिहाई बहुमत न होने के कारण यह विधेयक गिर गया था। अब देखना होगा कि सत्ता पक्ष का फ्लोर मैंनेजमेन्ट इतना कारगर साबित होता है। सोमवार से संसद से जब से विधेयक पेश किये जाएंगे तो विपक्ष का रूख कैसा होगा। यह देखना होगा। उम्मीद की जाने चाहिए कि सदन में जारी गतिरोध टूटेगा।

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