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8th Pay Commission : आठवें वेतन आयोग की बैठक में उठी बड़ी मांग, क्या कर्मचारियों की मूल तनख्वाह पहुंच जाएगी नए स्तर पर

केंद्रीय कर्मचारियों के बीच इन दिनों वेतन आयोग की बैठक सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। कोलकाता में शुरू हुई अहम बैठक पर लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी नजर बनाए हुए हैं। हर किसी के मन में यही सवाल है कि क्या इस बार वेतन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

बैठक शुरू होते ही कर्मचारी संगठनों की मांगों ने हलचल बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा चर्चा उस प्रस्ताव की हो रही है जिसमें मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन को कई गुना बढ़ाने और फिटमेंट फैक्टर में बड़ा बदलाव करने की मांग रखी गई है। हालांकि अंतिम फैसला अभी बाकी है।

कोलकाता में दो दिवसीय बैठक शुरू 8th Pay Commission

आठवें वेतन आयोग की दो दिवसीय बैठक 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में आयोजित की जा रही है। इसमें कर्मचारी संगठनों, पेंशनभोगी संघों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जा रहे हैं। आयोग अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले इन सभी सुझावों पर विचार कर रहा है।

इससे पहले आयोग की टीम भुवनेश्वर, दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में भी अलग अलग पक्षों से चर्चा कर चुकी है। इन बैठकों से मिले सुझाव अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

क्यों उठी 72000 रुपये मूल वेतन की मांग

बैठक में भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने 4 गुना फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव रखा है। संगठन का कहना है कि पिछले कई वर्षों में महंगाई और पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ी हैं, इसलिए मौजूदा वेतन संरचना में बड़े बदलाव की जरूरत है।

अगर 4 गुना फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो मौजूदा 18000 रुपये की न्यूनतम मूल तनख्वाह बढ़कर 72000 रुपये तक पहुंच (8th Pay Commission) सकती है। हालांकि यह केवल कर्मचारी संगठन की मांग है, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

क्या इतनी बढ़ोतरी संभव है

वित्तीय जानकारों का मानना है कि सरकार के लिए इस मांग को पूरी तरह स्वीकार करना आसान नहीं होगा। राजकोषीय भार और बजटीय स्थिति को देखते हुए 4 गुना फिटमेंट फैक्टर लागू होने की संभावना कम मानी जा रही है। कई कर्मचारी संगठन 2.86 से 3.83 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग भी कर रहे हैं।

इन मुद्दों पर भी होगी चर्चा

बैठक में वेतन के अलावा पुरानी पेंशन योजना की बहाली, एकीकृत पेंशन व्यवस्था, मकान किराया भत्ता, पेंशनभोगियों की चिकित्सा सुविधाएं और कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। इन विषयों पर मिलने वाले सुझाव आयोग की अंतिम सिफारिशों का हिस्सा बन सकते हैं।

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