संपादकीय

संपादकीय: यूरेनियम को लेकर फंसा पेंच

Editorial: अमेरिका और ईरान के बीच समझौता वार्ता अभी भी अधर में लटकी हुई है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ समझौता लगभग तय हो गया है और जल्द ही इसे अंतिम रूप देकर इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे लेकिन जब तक समझौता नहीं हो जाता तब तक होर्मूज पर अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहेगी। अमेरिका राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया है कि परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम सौंपने के मामले में भी सहमति बन रही है। डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे का ईरान ने तत्काल खंडन कर दिया और यह स्पष्ट किया है कि परमाणु मुद्दा फिलहाल बातचीत से बाहर है।

ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम किसी भी तीसरे देश को कतई नहीं सौंपेगा और न ही अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करेगा। ईरान ने उल्टे अमेरिका को यह चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने इस मुद्दे को लेकर दबाव डाला या फिर जंग छेडऩे की हिमाकत की तो ईरान उसे मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। ईरान का कहना है कि अमेरिका होर्मूज पर अपना कब्जा चाहता है लेकिन ईरान ऐसा होने नहीं देगा। गौरतलब है कि चालीस दिनों के युद्ध के बाद भले ही सीजफायर हो गया हो लेकिन होर्मूज अभी तक आवाजाही के लिए नहीं खोला गया है। इसकी वजह से दुनिया के कई देशों में तेल और गैस का संकट विकराल होता जा रहा है और उनकी अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी है।

डोनाल्ड ट्रंप ने चीन यात्रा के दौरान वहां के राष्ट्रपति सीजींगपींग से होर्मूज को खुलवाने मदद की अपील की थी लेकिन चीन ने भी ट्रंप को कोरा आश्वासन देकर बैरंग लौटा दिया था इसके बावजूद पता नहीं क्यों ट्रंप को इस बात का भरोसा है कि अब चीन ईरान की मदद नहीं करेगा न ही उसे हथियार देगा जबकि हकीकत यह है कि अमेरिका के खिलाफ रूस और चीन दोनों ही ईरान के साथ हैं जबकि अमेरिका अकेला पड़ गया है यूरोपीएन देशों ने भी इस मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है। इसके बाद भी डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर समझौते के लिए जंग की धमकी देकर दबाव बना रहे हैं।

एक ओर तो वो यह कहते हैं कि ईरान के साथ समझौता लगभग तय है वहीं दूसरी ओर वे फिर ईरान को धमकी देने लगते हैं। नतीजतन दोनों के बीच समझौता होने की संभावना धूमिल होती जा रही है। यदि फिर से जंग छिड़ी तो खाड़ी देशों के साथ ही आधी दुनिया को इसके गंभीर दुष्परिणाम भुगतने होंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाया है लेकिन बात नहीं बन पा रही है।

यही वजह है कि अब उन्होंने अमेरिका विदेश मंत्री मार्को रोबियो को भारत भेजा है और उनके जरिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिका आने का आमंत्रण दिया है। यही नहीं बल्कि एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप ने प्रशंसा के पूल बांधते हुए उन्हें एक महान नेता बताया है कुल मिलाकर डोनाल्ड ट्रंप समझ गये हैं कि इस संभावित जंग से अमेरिका को बाहर निकालने में भारत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। किन्तु भारत ने भी इस बारे में न काहूं से दोस्ती न काहूं से बैर वाली नीति अपना रखी है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच समझौता खटाई में पड़ सकता है।

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