Chhattisgarh High Court : शादी से इनकार के बाद लगातार पीछा और धमकी देना कैसे बना बड़ा अपराध, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
शादी के लिए लगातार दबाव और पीछा किए जाने से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले (Chhattisgarh High Court) ने लोगों का ध्यान खींचा है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद कानूनी हलकों के साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है कि किसी को बार बार मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कितनी गंभीर कानूनी जिम्मेदारी पैदा कर सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि युवती को लंबे समय तक परेशान किया गया, शादी से इनकार करने पर धमकियां दी गईं और उसका पीछा किया जाता रहा। अदालत ने पूरे घटनाक्रम को एक साथ देखते हुए माना कि यह केवल अलग अलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि लगातार ऐसा व्यवहार था जिसने पीड़िता को मानसिक रूप से टूटने पर मजबूर कर दिया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा Chhattisgarh High Court
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि शादी से इनकार करने के बाद किसी युवती का लगातार पीछा करना, उसे परेशान करना, शादी के लिए दबाव बनाना और बार बार जान से मारने की धमकी देना आत्महत्या के लिए उकसाने का सक्रिय कृत्य (Chhattisgarh High Court) माना जा सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत अपराध बन सकता है।

राज्य सरकार की अपील पर हुई सुनवाई
यह मामला राज्य सरकार की उस अपील से जुड़ा था जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी लगातार युवती पर शादी का दबाव बना रहा था। इनकार करने पर उसने युवती और उसकी मां को जान से मारने की धमकियां भी दीं। लगातार मानसिक प्रताड़ना के कारण युवती ने आत्महत्या कर ली।
ट्रायल कोर्ट की गलती पर हाईकोर्ट की टिप्पणी Chhattisgarh High Court
ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आरोपी को बरी कर दिया था कि आत्महत्या के लिए उकसाने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं और कथित सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग की विशेषज्ञ से जांच नहीं कराई गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की राय को निर्णायक मानना उचित नहीं है। यदि अन्य भरोसेमंद साक्ष्य आरोपी के व्यवहार को साबित करते हैं तो विशेषज्ञ की राय मात्र सहायक साक्ष्य होती है।
लगातार प्रताड़ना को माना उकसाने वाला व्यवहार
सुनवाई के दौरान अदालत ने मृतका की मां के बयान समेत अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। रिकॉर्ड से यह सामने आया कि आरोपी बार बार युवती का पीछा करता था, उसे परेशान करता था और धमकियां देता था। पुलिस और ग्राम पंचायत के हस्तक्षेप के बाद भी उसका व्यवहार नहीं बदला। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी की हरकतों के कारण युवती पहले भी आत्महत्या का प्रयास कर चुकी थी।
बरी करने का फैसला रद्द Chhattisgarh High Court
हाईकोर्ट ने कहा कि जब ट्रायल कोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी कर गलत निष्कर्ष पर पहुंच जाए, तब अपीलीय अदालत बरी करने का फैसला पलट (Chhattisgarh High Court) सकती है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को बरी करने का आदेश रद्द कर दिया और भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत दोषी ठहराते हुए सजा तय करने के लिए मामले को अलग से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।



