संपादकीय: पाला बदलने की फिराक में बवाल
Editorial: महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक एकछत्र राज करने वाले और राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार एक बार फिर पाला बदलने की फिराक में हैं। वैसे भी शरद पवार हवा का रूख भांपकर पाला बदलत रहे हैं। अब उन्हें इस बात का एहसास हो गया है कि इंडी गठबंधन का कोई भविष्य नहीं रह गया है ऐसे में इंडी गठबंधन का हिस्सा बने रहने से कोई फायदा नहीं होगा। महाराष्ट्र में भी उन्होनें जो महाविकास अघाड़ी का अस्तित्व भी मिटने जा रहा है। शिवसेना यूबीटी भी टूट फूट कर कमजोर हो चुकी है और महाराष्ट्र में कांग्रेस की भी स्थिति लगातार खराब हो रही है।
ऐसाी स्थिति में शरद पवार की पार्टी में जो आठ सांसद और दस विधायक बचे हैं उनमें गहरा असंतोष ऊभर रहा है। इनमें से अधिकांश सांसद और विधायक यह चाहते हैं कि वे सत्ताधारी गठबंधन के साथ रहे ताकि वे अपने अपने क्षेत्रो में ज्यादा से ज्यादा विकास कार्य करा सकें और दुबारा चुनाव जीतकर आ सकें। अपनी पार्टी के सांसदों और विधायकों के दबाव में आकर ही अब शरद पवार पाला बदलने का मन लगभग बना चुकें हैं। बात सिर्फ सौदेबाजी पर अटकी हुई है।
शरद पवार जितने बड़े राजनीतिज्ञ हैं उतने बड़े ही वे राजनीति के सौदागर भी हैं। वे कोई भी काम बगैर नफा नुकसान की सोचे नहीं उठाते। उनकी राजनीतिक पारी तो अब समाप्ति की ओर है। असल चिंता उन्हें अपनी सुप्रीया सुले की है। वे अपने जीते जी सुप्रीया सुले को राजनीति के ऊंचे मुकाम देखना चाहते हैं। वे इसी शर्त पर पाला बदलेंगे जब भाजपा नेतृत्व सुप्रीया सुले को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए राजी हो जाएगा। इसके लिए शरद पवार के खास लोग लगातार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फण्डवीस से चर्चा कर रहे हैं। सुप्रीया सुले ने भी इस बीच भाजपा और एनडीए के प्रति अपना रूख नरम कर लिया है।
गौरतलब है कि एनडीए को संसद के इस मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन संसोधन विधेयक को पारित कराने के लिए अपनी ताकत बढ़ानी है। ऐसे में शरद पवार गुट के आठ लोकसभा सदस्य का समर्थन मिलने से उसकी राह आसान हो जाएगी। इस पर सुप्रीया सुले ने बयान भी दे दिया है कि यदि परिसीमन से लोकसभा की 50 प्रतिशत सीटें बढ़ती है तो उनकी पार्टी इसका समर्थन कर सकती है। जाहिर है शरद पवार गुट इस संसोधन विधेयक में सरकार का साथ दे सकता है इसके बाद शरद पवार गुट और अजीत पवार गुट एकजुट हो सकते हैं। ऐसे हुआ तो शरद पवार गुट भी एनडीए का हिस्सा बन जाएगा ।
हालांकि अजीत पवार गुट के कुछ नेता शरद पवार गुट के साथ आने का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि दोनों गुटों के एक हो जाने से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में फिर से शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रीया सुले का दबदबा बढ़ जाएगा और ऐसे में उनके लिए दिक्कत खड़ी हो सकती है। इसी अंतरविरोध के चलते दोनों गुटों के विलय का मामला अटका हुआ है लेकिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फण्डवीस दोनों गुटों के बीच समझौता कराने में लगे हुए हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इसमें वे कितने सफल होते हैं।



