Intensifying war of words in up : यूपी में तेज होती जुबानी जंग

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में अभी लगभग छह माह का समय शेष है लेकिन वहां अभी से जुबानी जंग (Intensifying War of Words in UP) तेज होने लगी है। यूपी में सत्तारूढ़ भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारी बहुत पहले से शुरू कर दी है और अब समाजवादी पार्टी ने यूपी के सभी जिला मुख्यालयों में पीडीए सम्मेलन आयोजित करना शुरू कर दिया है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को पूरा भरोसा है कि पिछले लोकसभा चुनाव की तरह ही इस बार विधानसभा चुनाव में भी उनका पीडीए फॅार्मूला कारआमद सिद्ध होगा। यह बात अलग है कि सपा के गढ़ कहे जाने वाले कन्नौज में पीडीए सम्मेलन फ्लाप शो सिद्ध हुआ।
इस बीच भाजपा और सपा में असंतुष्ट नेताओं ने दल बदलना भी शुरू कर दिया है और इसे लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लडऩे की चुनौती देकर जुबानी जंग की शुरुआत की तो इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने उनकी चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि वे अयोध्या से चुनाव लडऩे को तैयार हैं लेकिन शर्त यह कि अखिलेश यादव भी अयोध्या से उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे। इसके बाद अखिलेश यादव की बोलती बंद हो गई है। वैसे भी अखिलेश यादव को भाजपा से ज्यादा अपने गठबंधन की चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।
कांग्रेस के साथ सीटों का बंटवारा उनके लिए सिरदर्द बना हुआ है। कांग्रेस यूपी की 403 सीटों में से 170 से ज्यादा सीटें मांग रही है जबकि सपा कांग्रेस को 50 सीटें ही देना चाहती है। सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा सांसद इकरा हसन के बीच तीखी जुबानी जंग हो चुकी है। इकरा हसन ने तो इमरान मसूद को बेवकूफ तक कह दिया था तो इमरान मसूद ने भी तुर्की बतुर्की जवाब दिया था कि कांग्रेस कोई भीख नहीं मांग रही है। अगर कांग्रेस को सम्मान जनक सीटें नहीं दी गई तो वह अकेले अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी। कांग्रेस और सपा नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग को देखते हुए यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों में गठबंधन हो पाएगा भी या नहीं। दरअसल यूपी के बीस प्रतिशत मुस्लिम वोटों का बंटवारा रोकने की मजबूरी ही कांग्रेस और सपा को गठबंधन बनाने के लिए बाध्य कर रही है और दोनों ही पार्टियां मुस्लिम बहुल सीटों पर अपना दावा ठोक रही हैं जिनकी संख्या लगभग 70 है।
सपा और कांग्रेस की पेशानी पर एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी की यूपी में बढ़ती सक्रियता ने बल डाल दिया है। जो सपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साध रहे हैं और साफ कह रहे हैं अब मुस्लिम गांधी, नेहरू और यादव को नेता बनाने के लिए काम नहीं करेगा वह अपना नेता अपने बीच के व्यक्ति को बनाएगा। अब अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा वाला उनका जुमला यूपी के मुस्लिम युवाओं को प्रभावित कर रहा है। रामपुर की उनकी जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ ने अखिलेश यादव की नींद उड़ा दी।
ओवैसी लगातार यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान की गिरफ्तारी का मुद्दा उठा रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि अखिलेश यादव ने उनको उनके हाल पर क्यों छोड़ दिया। ओवैसी की सफल जनसभा के बाद अखिलेश यादव को दौड़कर रामपुर जाना पड़ा और जेल में बंद आजम खान से मिलकर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश करनी पड़ी। कुल मिलाकर असदुद्दीन ओवैसी मुस्लिम बहुल पश्चिम यूपी की सीटों पर सपा का चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं।
हो सकता है इस बार वे उत्तर प्रदेश में कुछ सीटें जीतने में भी कामयाब हो जाएं। ओवैसी से घबराए अखिलेश यादव ने उन्हें रावण कहकर आ बैल मुझे मार वाली कहावत चरितार्थ कर ली है अब ओवैसी अखिलेश यादव पर और तीखे शब्द बाण चलाएंगे और सपा का खेल बिगाडऩे में पूरी ताकत लगा देंगे। बहरहाल अभी तो जुबानी जंग शुरू हुई है आगे चलकर यह और तेज होगी। इससे किसे कितना फायदा होगा और किसे कितना नुकसान उठाना पड़ेगा यह तो आने वाला वक्त ही बेहतर बताएगा।



