छत्तीसगढ़

Tree Doctors: छाल काटकर मौत के मुहाने पर पहुंचाए पेड़, अब ‘ट्री डॉक्टर देंगे नई जिंदगी!

  • पेड़ों को मिलेगी नई जिंदगी, ‘ट्री डॉक्टर ने संभाला मोर्चा, 3500 वृक्षों का होगा उपचार
  • करका वन क्षेत्र में पेड़ों की छाल काटकर पहुंचाया गया नुकसान
  • ब्रिज ग्राफ्टिंग समेत वैज्ञानिक तकनीकों से वृक्षों को बचाने की पहल
  • ड्रोन सर्वे में दशकभर में 1.25 लाख से अधिक पेड़ों के नष्ट होने का अनुमान

रायपुर/धमतरी। जंगल में पेड़ों को काटना ही वन संपदा को नुकसान पहुंचाने का एकमात्र तरीका नहीं है। पेड़ों के तने की छाल को चारों ओर से काटकर भी उन्हें धीरे-धीरे मौत के मुहाने पर पहुंचाया जा सकता है। धमतरी के करका वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में वृक्षों के साथ ऐसी ही क्षति सामने आई है। अब इन पेड़ों को नया जीवन देने के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत करीब 3500 क्षतिग्रस्त वृक्षों का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा रहा है। अभियान में देशभर में वृक्ष संरक्षण के लिए पहचाने जाने वाले बेंगलुरु के विशेषज्ञ विजय निशांत भी जुटे हैं, जिन्हें ‘ट्री डॉक्टर (Tree Doctors) के नाम से जाना जाता है।

छाल कटने से कमजोर हुई पेड़ों की जीवनधारा

करका वन क्षेत्र में पेड़ों के तनों की छाल को चारों ओर से काटने की प्रक्रिया को वनस्पति विज्ञान(Tree Doctors) में ‘गर्डलिंग कहा जाता है। इससे पेड़ के भीतर भोजन और पोषक तत्वों के परिवहन की व्यवस्था बाधित हो जाती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर वृक्ष धीरे-धीरे सूखकर मर सकते हैं। ऐसे में वन विभाग के सामने चुनौती क्षति का आकलन करने के साथ उन पेड़ों की पहचान करना भी है, जिन्हें वैज्ञानिक उपचार से बचाया जा सकता है।

ड्रोन सर्वे में सामने आई नुकसान की तस्वीर

ड्रोन सर्वेक्षण और उपग्रह चित्रों के तुलनात्मक अध्ययन में करका वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए नुकसान का आकलन सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में यहां 1.25 लाख से अधिक पेड़ों के नष्ट होने का अनुमान है। वहीं, वन क्षेत्र में अतिक्रमण का दायरा वर्ष 2016 के करीब 22 हेक्टेयर से बढ़कर 2026 में 102.47 हेक्टेयर तक पहुंच गया। ये आंकड़े वन संरक्षण और जैव विविधता के सामने खड़ी चुनौतियों की गंभीरता को उजागर करते हैं।

ब्रिज ग्राफ्टिंग से जोड़ेंगे जीवन की कड़ी

क्षतिग्रस्त वृक्षों को बचाने के लिए ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग समेत विभिन्न वैज्ञानिक तकनीकों (Tree Doctors) का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें तने के प्रभावित हिस्से के ऊपर जीवित ऊतकों के बीच दोबारा संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जाता है, ताकि पोषक तत्वों का परिवहन बहाल करने में मदद मिल सके। इसके अलावा ट्री बैंडेजिंग, घावों की देखभाल और जड़ों को मजबूत करने जैसे उपाय भी किए जा रहे हैं। प्रत्येक पेड़ की प्रजाति, उम्र, तने की मोटाई और क्षति की गंभीरता के आधार पर उपचार तय किया जा रहा है। सभी चिह्नित वृक्षों को क्रमांक देकर उनका रिकॉर्ड भी तैयार किया गया है।

100 से अधिक वनकर्मी जुटे, होगी नियमित निगरानी

इस अभियान में टाइगर रिजर्व के 100 से अधिक मैदानी वनकर्मी (Tree Doctors), उद्यानिकी विशेषज्ञ और ग्राफ्टिंग के जानकार शामिल हैं। ट्री डॉक्टर विजय निशांत और प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन की विशेषज्ञता से पेड़ों के उपचार के साथ वनकर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उपचार के बाद प्रत्येक वृक्ष की नियमित निगरानी होगी, ताकि उसकी सेहत में होने वाले बदलाव और उपचार के परिणाम दर्ज किए जा सकें।

वृक्ष व जंगल बचाने की व्यापक चुनौती

करका वन क्षेत्र पैरी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है। यहां के जंगलों को होने वाला नुकसान मिट्टी के संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र और जैव विविधता को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के साथ अतिक्रमण पर नियंत्रण और शेष वन क्षेत्र की सुरक्षा भी जरूरी है। मैदानी निरीक्षण के दौरान कुछ पेड़ों के क्षतिग्रस्त तनों पर नए ऊतकों का विकास भी दिखाई दिया है। विशेषज्ञ यह समझने का प्रयास करेंगे कि किन परिस्थितियों में पेड़ का घाव भर सकते हैं और कहां अतिरिक्त उपचार जरूरी है।

विशेषज्ञों की मदद से प्रत्येक वृक्ष की स्थिति के अनुरूप उपचार किया जा रहा है। उपचार के परिणामों का रिकॉर्ड रखकर प्रभावी तकनीकों की पहचान की जाएगी। विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक वृक्षों को बचाने के साथ करका वन क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत का संरक्षण करना है।वरुण जैन, उपनिदेशक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व

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