Chhatti Of Baby Elephant : कोरबा में बेबी एलिफेंट की छठी, नाम रखा ‘काशी

छठी कार्यक्रम में 7 गांवों के ग्रामीण हुए शामिल, 26 साल पहले आए हाथी
कोरबा/नवप्रदेश। वन मंडल कोरबा के करतला रेंज में इन दिनों 9 हाथियों का झुंड विचरण कर रहा है। इस झुंड में नन्हे मेहमान के आने की खुशी में रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने अनोखी परंपरा निभाते हुए बेबी एलिफेंट की छठी(Chhatti Of Baby Elephant ) मनाई और उसका नाम ‘काशी रखा।
यह कार्यक्रम (Chhatti Of Baby Elephant ) काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई थी। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ जीवन की कामना की। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हाथियों का यह झुंड अभी काशीपानी के जंगल में ही घूम रहा है। वहीं जिले के कुदमुरा रेंज में 32 हाथी और 7 हाथी चचिया क्षेत्र में मौजूद हैं। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसल को नुकसान भी पहुंचाया है।
धिनारा गांव से शुरू हुई छठी की परंपरा
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल से हाथी करतला रेंज के इस जंगल में आते हैं और लंबे समय तक रुकने के बाद वापस चले जाते हैं। यह उनका पुराना कॉरिडोर है। बेबी एलिफेंट की छठी (Chhatti Of Baby Elephant ) मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। ग्रामीण हाथियों को लेकर अब जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां हाथियों को भगवान मानकर पूजा की जाती थी, अब ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं।
हाथियों से छेड़छाड़ न करें, दूरी बनाए रखें
एसडीओ मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों से छेड़छाड़ न करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के मामलों में नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है, जनहानि रोकने के लिए सतर्क रहना जरूरी है। जिले में हाथी वर्ष 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे हाथियों की संख्या बढ़ती गई। कई बार जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।



