Sonam Raghuvanshi : सोनम रघुवंशी को आखिर क्यों करना होगा आत्मसमर्पण, सर्वोच्च अदालत के फैसले ने बदल दी पूरी तस्वीर
इंदौर से लेकर मेघालय तक चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों (Sonam Raghuvanshi) में है। अदालत के नए फैसले की खबर सामने आते ही मामले को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई। कानूनी गलियारों में भी इस फैसले को लेकर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और पूरे मामले पर सबकी नजरें टिक गईं।
सुबह से ही इस प्रकरण पर हलचल बनी रही। जिन लोगों की नजर इस मामले की सुनवाई पर थी, वे फैसले का इंतजार करते रहे। आखिरकार सर्वोच्च अदालत ने ऐसा आदेश दिया जिसने आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी के लिए राहत की उम्मीदों पर फिलहाल विराम लगा दिया।

जमानत रद्द, तीन सप्ताह में करना होगा आत्मसमर्पण Sonam Raghuvanshi
इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हुई हत्या के मामले में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि यदि मुकदमे की सुनवाई में देरी होती है तो छह महीने बाद वह दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती हैं।
सुनवाई में दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क
सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान सोनम के वकील ने कहा कि इस मामले में कुल 94 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल 4 गवाहों के बयान दर्ज हो सके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पूरक आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है और कड़ी शर्तों के साथ मिली जमानत का पालन किया जा रहा है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि सोनम ने आत्मसमर्पण नहीं किया था बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। उनके अनुसार गिरफ्तारी को आत्मसमर्पण बताया जा रहा है, जबकि ऐसा नहीं है। साथ ही कहा गया कि जमानत की सभी शर्तों का पालन किया जा रहा है और फरार होने की कोई आशंका नहीं है।

राज्य सरकार ने उठाए जमानत पर सवाल Sonam Raghuvanshi
राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि गिरफ्तारी से जुड़े जिस आधार का हवाला (Sonam Raghuvanshi) दिया जा रहा है, उसका कोई ठोस आधार नहीं है। उनका कहना था कि आरोपी ने स्वयं आत्मसमर्पण किया था और आरोप पत्र में भी इसका उल्लेख मौजूद है।
उन्होंने यह भी कहा कि दस्तावेज में एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में हुई तकनीकी गलती को आधार बनाकर जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता। राज्य सरकार का पक्ष था कि यदि जमानत जारी रहती है तो आरोपी के फरार होने की आशंका बनी रहेगी।
पहले अदालत ने दिए थे दो विकल्प
इससे पहले हुई सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने सोनम रघुवंशी के वकील से पूछा था कि क्या वह स्वयं आत्मसमर्पण (Sonam Raghuvanshi) करेंगी या फिर अदालत जमानत रद्द करने पर फैसला सुनाए। वहीं अपने जवाब में सोनम ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। उनका कहना था कि केवल आरोपों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता।
फैसले के दौरान अदालत की अहम टिप्पणी
जमानत रद्द करने का आदेश सुनाते समय सर्वोच्च अदालत ने बदलते सामाजिक माहौल पर भी टिप्पणी (Sonam Raghuvanshi) की। अदालत ने कहा कि आज की नई पीढ़ी पहले की तुलना में अधिक जानकारी रखती है, लेकिन दबाव का सामना करने की क्षमता अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि लोगों के पास जानकारी (Sonam Raghuvanshi) अधिक है, लेकिन ज्ञान नहीं। इस पर न्यायमूर्ति ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल व्हाट्सएप पर साझा होने वाली हर बात को ही ज्ञान मान लिया जाता है।


