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Amul Digital Dairy: ‘गाय से क्लाउड और क्लाउड से ग्राहक’ तक पहुंचा डिजिटल मॉडल, डेयरी सेक्टर में तकनीक से बड़ा बदलाव

भारत की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्था अमूल ने डेयरी (Amul Digital Dairy) क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग कर पशुपालन से लेकर उपभोक्ता तक की पूरी प्रक्रिया को आधुनिक बनाया है। अमूल डिजिटल डेयरी मॉडल के तहत पशु स्वास्थ्य, कृत्रिम गर्भाधान, दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान और सप्लाई चेन को एकीकृत डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया है। इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, पशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना और डेयरी व्यवसाय को अधिक पारदर्शी एवं वैज्ञानिक बनाना है।

‘गाय से क्लाउड और क्लाउड से ग्राहक’ की अवधारणा

गुजरात के आनंद स्थित अमूल डेयरी में छत्तीसगढ़ के पत्रकारों से बातचीत के दौरान मानव संसाधन प्रमुख डॉ. प्रीति शुक्ला ने बताया कि अमूल का पूरा डिजिटल मॉडल ‘गाय से क्लाउड और क्लाउड से ग्राहक’ (Amul Digital Dairy) की अवधारणा पर आधारित है। इसके तहत पशु के जन्म, पहचान, टीकाकरण, स्वास्थ्य और प्रजनन से जुड़ी हर जानकारी डिजिटल रूप में सुरक्षित रखी जाती है। किसान मोबाइल प्लेटफॉर्म के जरिए पशु चिकित्सा सेवा और कृत्रिम गर्भाधान की ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकते हैं।

स्मार्ट नेक बेल्ट से होगी पशुओं की निगरानी

अमूल ने पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए स्मार्ट नेक बेल्ट तकनीक अपनाई है। यह उपकरण पशु की गतिविधियां, भोजन, आराम और हीट साइकिल पर नजर (Amul Digital Dairy) रखता है। इससे बीमारी के शुरुआती संकेत समय रहते मिल जाते हैं और कृत्रिम गर्भाधान के लिए उपयुक्त समय की पहचान भी आसान हो जाती है। यह सुविधा किसानों को लगभग तीन रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के किराये पर उपलब्ध कराई जा रही है।

AI और आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी उत्पादकता Amul Digital Dairy

डेयरी क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाते हुए अमूल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित डिजिटल सहायक ‘सरलाबेन’ विकसित किया है। किसान अपनी पहचान संख्या के माध्यम से पशुओं की जानकारी, स्वास्थ्य संबंधी सलाह और अन्य सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, भ्रूण प्रत्यारोपण (IVF), डिजिटल गलन इकाई और स्मार्ट लिक्विड नाइट्रोजन सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे उच्च उत्पादक नस्लों का विकास संभव हो सके।

गांवों तक पहुंचीं डिजिटल पशु स्वास्थ्य सेवाएं

पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए गांवों में ग्राम संसाधन व्यक्तियों की नियुक्ति की गई है। इनके माध्यम से पशुओं की प्रारंभिक जांच, थनैला रोग की पहचान, गर्भ जांच और टीकाकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। टीकाकरण की निगरानी जीपीएस आधारित प्रणाली से की जा रही है, जबकि इस अभियान में ग्रामीण महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

दूध संग्रहण से भुगतान तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल

अमूल ने दूध संग्रहण केंद्रों से लेकर डेयरी संयंत्र तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल बनाया है। जीपीएस आधारित दूध टैंकर ट्रैकिंग, स्वचालित सैंपलिंग सिस्टम, गुणवत्ता परीक्षण और डिजिटल भुगतान व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो गई है। डेयरी प्लांट में पेपरलेस डिस्पैच, ऑनलाइन अनुमोदन, डिजिटल फाइल प्रबंधन और स्वचालित भंडारण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।

‘मिल्क-ओ-बाइक’ से युवाओं को रोजगार Amul Digital Dairy

ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अमूल ने ‘मिल्क-ओ-बाइक’ पहल शुरू की है। इसके तहत पोर्टेबल मिल्किंग मशीन के साथ युवा किसानों के घर जाकर दूध निकालने की सेवा देते हैं। इससे किसानों का श्रम कम होता है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

अमूल का कहना है कि डिजिटल तकनीक (Amul Digital Dairy) के जरिए किसान, पशु, दुग्ध सहकारी समितियों और उपभोक्ताओं को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, सेवाएं समय पर उपलब्ध होंगी, उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और पशुपालन किसानों के लिए पहले से अधिक लाभकारी बन सकेगा।

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