Smart Farming : कम बारिश की आशंका के बीच किसानों के लिए नई सलाह, अब कम पानी वाली खेती पर रहेगा जोर
मध्य प्रदेश में इस बार सामान्य से कम बारिश की संभावना को देखते (Smart Farming) हुए खेती की तैयारियों ने नया मोड़ ले लिया है। मौसम के बदलते मिजाज के बीच किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ने की सलाह दी जा रही है, जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकें। सरकार का मानना है कि समय रहते सही रणनीति अपनाने से उत्पादन और किसानों की आय दोनों सुरक्षित रह सकती हैं।
प्रदेश में कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियां लगातार हालात की समीक्षा कर रही हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण और वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी खेती पर अधिक असर न पड़े।
कम पानी वाली फसलों पर जोर Smart Farming
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से ऐसी फसलें अपनाने की अपील की है, जो कम अवधि और कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु को देखते हुए खेती की योजना भी उसी के अनुसार बनानी होगी। सरकार का कहना है कि जिलेवार निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती को बताया बेहतर विकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती भविष्य की टिकाऊ कृषि पद्धति बनकर उभर रही है। इससे रासायनिक लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलती है। उन्होंने किसानों से परंपरागत खेती के साथ प्राकृतिक खेती को भी अपनाने का आग्रह किया।
ड्रिप सिंचाई और जल संरक्षण पर फोकस
कम वर्षा की संभावना को देखते हुए पानी के बेहतर उपयोग पर विशेष जोर दिया (Smart Farming) गया है। किसानों को वर्षा जल संचयन, खेतों में नमी संरक्षण और ड्रिप तथा स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसलों का चयन कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग की तकनीकी सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।
श्रीअन्न की खेती बढ़ाने की अपील
सरकार ने किसानों से श्रीअन्न यानी मोटे अनाज का रकबा बढ़ाने की भी अपील की है। कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार और बाजरा जैसी फसलें कम पानी में अच्छी उपज देती हैं और जलवायु परिवर्तन के दौर में सुरक्षित विकल्प मानी जा रही हैं। इन फसलों की लागत अपेक्षाकृत कम है और बाजार में इनकी मांग भी लगातार बढ़ रही है।
किसानों तक पहुंच रही मौसम की जानकारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों को मौसम से जुड़ी जानकारी मोबाइल संदेश और सोशल मीडिया आधारित मैसेजिंग सिस्टम के जरिए नियमित रूप से भेजी जा रही है।
इसके साथ ही बीज उपचार, वैज्ञानिक बुवाई और कम पानी में सफल होने वाली फसलों की खेती से जुड़ी सलाह भी समय समय पर उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसान मौसम के अनुसार सही निर्णय ले सकें।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध (Smart Farming) है। वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।



