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Punjab Congress : बघेल के लौटते ही फिर बढ़ी पंजाब कांग्रेस की तकरार, नेतृत्व को लेकर खींचतान थमने के बजाय हुई तेज

पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान सुलझाने की कोशिशों के बावजूद विवाद थमता नजर (Punjab Congress) नहीं आ रहा है। कई दौर की बैठकों और नेताओं से बातचीत के बाद भी संगठन के भीतर मतभेद खुले तौर पर सामने आने लगे हैं। इससे विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पांच दिन के दौरे पर पंजाब पहुंचे थे और उन्होंने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से लगातार चर्चा की। हालांकि उनके लौटने के बाद एक बार फिर दोनों गुटों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे सियासी हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

92 नेताओं से बैठक, फिर भी नहीं निकला समाधान Punjab Congress

कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब कांग्रेस में जारी विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी भूपेश बघेल को सौंपी थी। उन्होंने चंडीगढ़ में करीब 92 नेताओं के साथ अलग अलग दौर की बैठकें कीं। कोशिश थी कि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गुट के बीच सहमति बन सके। हालांकि बैठकों के बाद भी चन्नी गुट अपनी मांग पर कायम रहा।

वडिंग को हटाने की मांग पर अड़ा चन्नी गुट

चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग को पद से हटाने की मांग दोहराई। इसके जवाब में भूपेश बघेल ने साफ किया कि राजा वडिंग ही पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहेंगे।

उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं ने अपने सुझाव और शंकाएं रखी हैं, जिन्हें पार्टी हाईकमान के सामने रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया जाएगा।

बघेल के लौटते ही फिर तेज हुई बयानबाजी

भूपेश बघेल के छत्तीसगढ़ लौटने के बाद विवाद फिर खुलकर सामने आ गया। सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक दलों को अपने फैसले बदलने पड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2027 का चुनाव जीतने के लिए पार्टी को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है।

राजा वडिंग ने भी दिया जवाब

रंधावा के बयान के बाद प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भी पलटवार (Punjab Congress) किया। उन्होंने कहा कि यदि वे समझौतावादी होते तो रंधावा इतने लंबे समय तक उनके साथ काम नहीं करते।

राजा वडिंग ने यह भी कहा कि कांग्रेस में समझौतावादी नेताओं और स्लीपर सेल के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए संकेत दिया कि जो नेता विपक्षी दलों के संपर्क में रहते हैं, उनके लिए पार्टी में स्थान नहीं होना चाहिए।

अब आगे क्या

फिलहाल कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने का कोई संकेत नहीं दिया है। ऐसे में राजा वडिंग अपने पद पर बने रहेंगे। दूसरी ओर चन्नी गुट अपनी मांग से पीछे हटता नजर नहीं (Punjab Congress) आ रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने और चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता कायम रखने की कोशिश कर सकता है।

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