A question mark over the fairness of the election: चुनाव की निष्पक्षता पर सवालिया निशान
जिस तरह विपक्षी पार्टियां चुनाव (A question mark over the fairness of the election) में हारने के बाद अपनी पराजय का ठीकरा चुनाव आयोग के सिर पर फोडऩे हैं और पूरी चुनावी प्रक्रिया को ही कटघरे में खड़ा कर देती हैं। ठीक वही काम दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ ( डूसू) चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई कर रहा है। इस संगठन के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने डूसू चुनाव में एनएसयूआई प्रत्याशियों की शर्मनाक हार के लिए चुनाव प्रक्रिया को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है।
चुनाव की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने कहा है कि हमारी लड़ाई सिर्फ एबीवीपी से होती तो हम चुनाव जीत जाते लेकिन हमारे खिलाफ कई यूनिवर्सिटी का एडमिनिस्ट्रेशन, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे इसलिए हम चुनाव हार गए। यदि ऐसा है तो सवाल यह उठता है कि फिर एनएसयूआई का बागी प्रत्याशी भला उपाध्यक्ष पद का चुनाव कैसे जीत गया? जाहिर है एनएसयूआई ने प्रत्याशी चयन में गलती की जो उसकी करारी हार का कारण बनीं।
बहरहाल डूसू में एनएसयूआई की हार को लेकर कांग्रेस में अब मंथन हो रहा है। खुद राहुल गांधी ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जो इन दिनों छात्रों की गूँज कार्यक्रम चला रहे हैं और दूसरी ओर एनएसयूआई पंजाब और हैदराबाद के बाद नई दिल्ली छात्र संघ का चुनाव (A question mark over the fairness of the election) हार गई है। इस पर मंथन पहले होता तो कुछ बात बनती अब तो यही कहा जाएगा कि अब पछताए का होत है जब चिडिय़ा चुग गई खेत।



