Pandwani Teejan Bai : पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, पंडवानी जगत में शोक
रायपुर में रविवार की सुबह जैसे ही यह खबर फैली, सांस्कृतिक जगत में अचानक सन्नाटा (Pandwani Teejan Bai) छा गया। कला प्रेमियों के बीच एक ही चर्चा सुनाई देने लगी कि पंडवानी की वह बुलंद आवाज अब हमेशा के लिए शांत हो गई, जिसने वर्षों तक देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। शहर से लेकर गांव तक इस खबर ने लोगों को भावुक कर दिया।
एम्स रायपुर के बाहर भी दिनभर लोगों का आना जाना लगा रहा। कलाकार, साहित्यकार और लोकसंस्कृति से जुड़े अनेक लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। हर किसी के चेहरे पर यही पीड़ा थी कि भारतीय लोककला का एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसकी भरपाई आसानी से संभव नहीं होगी।
उपचार के दौरान ली अंतिम सांस Pandwani Teejan Bai
पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का रविवार को 72 वर्ष की आयु में रायपुर स्थित एम्स में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं और चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी था। उनके निधन की सूचना मिलते ही छत्तीसगढ़ सहित देशभर के सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर फैल गई। अनेक कलाकारों और समाज के विभिन्न वर्गों ने इसे लोक विरासत की बड़ी क्षति बताया।
पंडवानी को दुनिया तक पहुंचाने में निभाई बड़ी भूमिका
डॉ. तीजन बाई ने अपना पूरा जीवन पंडवानी कला के संरक्षण और उसके विस्तार के लिए समर्पित किया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट गायन शैली, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली मंच प्रस्तुति के साथ इस तरह प्रस्तुत किया कि पंडवानी को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिली। उनकी कला ने यह साबित किया कि लोक परंपराएं वैश्विक मंच पर भी सम्मान के साथ स्थापित हो सकती हैं।
संघर्ष से सफलता तक का प्रेरक सफर
साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्वभर में अपनी पहचान बनाने वाली डॉ. तीजन बाई संघर्ष, मेहनत और समर्पण की मिसाल रहीं। अनेक सामाजिक चुनौतियों के बीच उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और लोककला के क्षेत्र में नई पीढ़ी के लिए (Pandwani Teejan Bai) प्रेरणा बनीं। उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले।
हर वर्ग ने जताया गहरा शोक
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, कलाकारों, साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया। सभी ने उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की अनमोल धरोहर बताते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करता रहेगा।
हमेशा गूंजती रहेगी उनकी विरासत
डॉ. तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी क्षति माना (Pandwani Teejan Bai) जा रहा है। उनकी आवाज, उनकी मंच प्रस्तुति और पंडवानी के माध्यम से जीवंत की गई महाभारत की कथाएं हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेंगी। भारतीय लोककला के इतिहास में उनका नाम सदैव सम्मान और गौरव के साथ याद किया जाएगा।



