गनियारी गांव में रविवार का दिन भावुक कर देने वाला रहा। हर तरफ एक ही चर्चा (Teejan Bai School Rename) सुनाई दी कि अपनी लोककला से दुनिया भर में पहचान बनाने वाली पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई अब भले इस दुनिया में नहीं रहीं, लेकिन उनकी याद आने वाली पीढ़ियों के बीच हमेशा जीवित रहेगी। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में लोग जुटे और हर चेहरे पर उनके प्रति सम्मान साफ दिखाई दिया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान माहौल गंभीर रहा। गांव के लोगों, जनप्रतिनिधियों और कला प्रेमियों ने उन्हें नम आंखों से याद किया। इसी बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने एक ऐसी घोषणा की, जिसे सुनकर मौजूद लोगों ने इसे महान लोककलाकार के सम्मान की दिशा में बड़ा कदम बताया।
गनियारी की शासकीय पाठशाला का बदलेगा नाम Teejan Bai School Rename
राज्य सरकार ने विश्वविख्यात पंडवानी गायिका पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को विशेष सम्मान देने का निर्णय लिया है। मंत्री गजेंद्र यादव ने घोषणा की कि उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम बदलकर डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई हायर सेकेंडरी विद्यालय गनियारी रखा जाएगा। उन्होंने यह घोषणा श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए की।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
रायपुर के एम्स में कई दिनों तक उपचार चलने के बाद रविवार 6 जुलाई को डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही कला और संस्कृति से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित मंत्रिमंडल के कई सदस्य एम्स पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए गनियारी लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मंत्री गजेंद्र यादव भी मौजूद रहे।
संस्कृति जगत के लिए बड़ी क्षति
श्रद्धांजलि सभा में मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी विलक्षण कला, प्रभावशाली प्रस्तुति और आजीवन समर्पण से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को देश ही नहीं बल्कि दुनिया तक पहुंचाया। उनके जाने से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को बड़ी क्षति (Teejan Bai School Rename) हुई है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में शक्ति देने की प्रार्थना भी की।
आने वाली पीढ़ियों को मिलेगी प्रेरणा
मंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का पूरा जीवन लोककला, परंपरा और संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उनका संघर्ष, उपलब्धियां और कला साधना आने वाले समय में भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि विद्यालय का नाम उनके नाम पर किए जाने से छात्र छात्राएं उनके जीवन और सांस्कृतिक योगदान से लगातार प्रेरित होते रहेंगे। राज्य सरकार का यह फैसला महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि माना जाएगा।



