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Paddy Farming : पानी की कमी में भी नहीं होगी धान की चिंता, किसानों के लिए सामने आए ये बेहतर विकल्प

अल नीनो की आशंका और सिंचाई के संकट ने इस बार धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता (Paddy Farming) बढ़ा दी है। कई इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर संशय बना हुआ है, ऐसे में किसान ऐसी किस्मों की तलाश कर रहे हैं जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। कृषि विशेषज्ञ भी बदलते मौसम को देखते हुए नई और कम पानी वाली किस्में अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

इसी बीच किसानों के लिए राहत की खबर यह है कि ऐसी कई धान की किस्में उपलब्ध हैं, जो कम सिंचाई में भी अच्छी पैदावार देती हैं। इन किस्मों के कारण पानी की बचत के साथ उत्पादन बनाए रखने की उम्मीद बढ़ गई है।

कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली किस्में Paddy Farming

विशेषज्ञों के अनुसार पीआर 126, पूसा बासमती 1509, पूसा बासमती 1847, सहभागी, प्रभात और तुरंता जैसी धान की किस्में कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने में सक्षम हैं। इनमें कुछ किस्में 80 से 130 दिनों के भीतर तैयार हो जाती हैं और सूखे की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं।

नई कमला किस्म बनी किसानों की उम्मीद

डीआरआर धान 100 यानी कमला को कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है। यह किस्म सामान्य धान की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक उत्पादन देने में सक्षम बताई जा रही है। इसकी फसल करीब 130 दिनों में तैयार हो जाती है और इसमें मजबूत तना होने के कारण खराब मौसम में गिरने का खतरा भी कम रहता है। इसके साथ ही इस किस्म में पानी की बचत और मीथेन गैस का उत्सर्जन भी कम होता है।

अल नीनो के बीच भी बढ़ा रकबा

पानी की कमी की आशंकाओं के बावजूद इस खरीफ सीजन में धान की रोपाई का रकबा (Paddy Farming) बढ़ा है। पिछले वर्ष 3.88 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार यह बढ़कर 4.98 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे उत्पादन को लेकर किसानों की उम्मीदें बनी हुई हैं।

बदलते मौसम में विशेषज्ञों की सलाह

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई की समस्या है, वहां कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली धान की किस्मों को प्राथमिकता देना किसानों के लिए लाभदायक रहेगा। इससे उत्पादन लागत कम करने के साथ बदलते मौसम के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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