Bestiality that Shames Humanity: इंसानियत को शर्मसार करती हैवानियत
बिहार के जमुई में एक मासूम बच्ची के साथ इंसानी खाल में छिपे भेडिय़ों ने जो हैवानियत की है उसने इंसानियत (Bestiality that Shames Humanity) को शर्मसार कर दिया है। दसवीं कक्षा में पढऩे वाली उस छात्रा का कसूर बस इतना था कि वो ट्यूशन क्लास खत्म होने के बाद अपने सहपाठी के साथ वापस लौटते समय जंगल में घूमने चली गई। बस फिर क्या था उन्हें नैतिकता के तथाकथित ठेकेदार बने कुछ नरपिशाचों ने घेर लिया और फिर उनके साथ पाशविकता की सारी सीमाएं पार कर डालीं। दसवीं कक्षा की उस छात्रा के साथ जो घिनौना कृत्य हुआ उसे सारे देश ने देखा और हर किसी का खून खौल उठा।
यह तो गनीमत रही कि उक्त छात्रा के साथ उसी की कक्षा का जो छात्र था वह इन दरिंदों से डरा नहीं। अपनी साथी का हाथ और साथ नहीं छोड़ा। मार खाता रहा लेकिन उसने दरिंदों का पुरजोर विरोध किया। यदि वह डरकर वहां से भाग जाता तो उक्त छात्रा के साथ पता नहीं क्या होता? उस बहादुर बच्चे के इस जज्बे को सलाम। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस और बिहार सरकार पर दबाव बना और मुख्य आरोपी सहित उसके कुछ साथियों की गिरफ्तारी हुई। मुख्य आरोपी का हाफ एनकाउंटर भी हुआ। उसकी कुंडली खंगाली जा रही है। वह आदतन अपराधी बताया जा रहा है। उसे और उसके साथियों को देर सवेर उनके किए की सजा जरूर मिलेगी लेकिन सवाल यह उठता है कि इन हैवानों (Bestiality that Shames Humanity)के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए?
उनके मन में कानून का खौफ क्यों नहीं है? जाहिर है ऐसी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होता है। इस घटना का मुख्य आरोपी भी शराब और बालू के अवैध कारोबार से जुड़ा बताया जाता है। यह सब अवैध काम वह बगैर राजनीतिक संरक्षण के कर ही नहीं सकता। बिहार वैसे भी जंगल राज के लिए जाना जाता रहा है। जहां जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ होती रही है। लालू-राबड़ी के शासनकाल में बिहार में कैसा जंगल राज चलता था यह तथ्य सर्वविदित है लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार में भी यदि बिहार में जंगल राज चल रहा है तो यह इस सरकार के लिए शर्म की बात है।
बिहार में कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति इस बात का प्रतीक है कि भले ही वहां सरकार बदल गई हो लेकिन हालात जस के तस हैं। सम्राट चौधरी की सरकार में मंत्री एक जदयू नेता ने तो इस घटना को मामूली घटना बता कर जता दिया है कि वहां की सरकार कितनी संवेदनशील है? बहरहाल इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए बिहार सरकार को चाहिए कि वह आरोपियों का मामला फास्ट ट्रेक कोर्ट में चलवाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाए ताकि आपराधिक तत्वों के मन में कानून का डर पैदा हो और वे सपने में भी इस तरह के कृत्य करने का दु:साहस न कर पाएं।



