संपादकीय: उमर अब्दुल्ला के बदले सूर
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सूर अचानक बदल गये हैं। पहले वे केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सान में कसीदे पढ़ते रहते थे और अब उन्होंने केन्द्र सरकार पर न सिर्फ वादा खिलाफ करने का आरोप लगाया है बल्कि भाजपा पर जम्मू कश्मीर में आपरेशन लोटस चलाने का भी संसनीय खेज खुलासा किया है। उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि केन्द्र की भाजपा सरकार जम्मू कश्मीर में उनकी सरकार को गिराने के लिए नेशनल कांफ्रेन्स के विधायकों पर डोरे डाल रही है।
एक विधायक को 20 से 30 करोड़ रूपये देने का प्र्रलोभन दिया जा रहा है। उमर अब्दुला के इस बयान के बाद कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों ने भाजपा पर हमले तेज कर दिये हैं और कहा है कि भाजपा इसी तरह विधायकों और सांसदों की खरीद फरोख्त करके लोकतंत्र का गला घोंट रही है। उमर अब्दुल्ला के इस बयान पर भाजपा ने न सिर्फ तीखी प्रतिक्रिया दी है बल्कि उन्हें नोटिस भी भेजा है बल्कि जम्मू कश्मीर की भाजपा इकाई ने उन्हें भेजे गये कानूनी नोटिस में कहा है कि उमर अब्दुल्ला अपने इस आरोप के सबूत पेश करें अन्यथा उन्हें सौ करोड़ रूपये का हरजाना देना पड़ेगा।
क्योंकि उनके इस बयान से भाजपा की क्षवि धूमिल हुई है। इस नोटिस को उमर अब्दुल्ला ने गंभीरता से नहीं लिया है और कहा है कि मैं जम्मू कश्मीर का मैं इकलौता नेता हूं जिसे भाजपा ने इस तरह का लौ लेटर भेजा है। उमर अब्दुल्ला ने जम्मू में एक रैली निकालकर केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के अपने वादे से पीछे हट रही है। क्या इसके लिए अब कश्मीरियों ाके लद्दाख के लोगों की तरह आंदोलल करना पड़ेगा या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील करनी पड़ेगी।
उमर अब्दुल्ला का यह बयान निश्चित रूप से निंदनीय है। एक ओर तो वे लद्दाख का उदाहरण देकर जम्मू कश्मीर में हिंसक आंदोलन की धमकी दे रहे हैं वहीं डोनाल्ड ट्रंप से गुजारिश करने की बात करके वे अपने ही देश की केन्द्र सरकर को अपमानित कर रहे हैं। उमर अब्दुल्ला यह भूल गये हैं कि जम्मू कश्मीर का जो सालाना बजट है उसमें 60 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार देती है। ऐसे में यदि उमर अब्दुल्लाा केन्द्र से पंगा लेंगे तो इससे जम्मू कश्मीर का ही अहित होगा।



