Nava Raipur Township Project : 1100 एकड़ बसाने के बदले निजी कंपनी को मिलेगी बड़ी जमीन, फैसले पर उठने लगे कई सवाल

नवा रायपुर में प्रस्तावित नई टाउनशिप को लेकर इन दिनों हलचल (Nava Raipur Township Project ) तेज है। सरकारी जमीन के विकास के बदले निजी कंपनी को मिलने वाली जमीन को लेकर अलग अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं। परियोजना से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद अब पूरे मामले पर लोगों की नजरें टिक गई हैं।
शहर के विकास की इस बड़ी योजना के बीच सबसे ज्यादा सवाल इस बात पर उठ रहे हैं कि आखिर निजी डेवलपर को किस आधार पर विकसित जमीन के उपयोग और बिक्री का अधिकार दिया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर अब योजना पर विवाद भी गहराता नजर आ रहा है।
टाउनशिप योजना पर बढ़ा विवाद Nava Raipur Township Project
नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण की करीब 800 करोड़ रुपये की टाउन डेवलपमेंट स्कीम को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। लगभग 1100 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस टाउनशिप के लिए चयनित निजी डेवलपर को सड़क, नाली और अन्य आधारभूत सुविधाएं तैयार करनी होंगी। इसके बदले एल वन निविदाकार को 137 एकड़ विकसित भूमि का अधिकार दिया जाएगा।
पहले की योजना के अनुसार डेवलपर को 232.34 एकड़ विकसित जमीन के बिक्री अधिकार का प्रावधान था, लेकिन निविदा प्रक्रिया में प्रथम स्थान पर रहने वाले एल वन बोलीदाता ने 137 एकड़ भूमि की दर प्रस्तुत की है। उसी के अनुसार उसे जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
जमीन के उपयोग और बिक्री का मिलेगा अधिकार
टेंडर दस्तावेजों के मुताबिक डेवलपर को मिश्रित उपयोग वाले भूखंडों के विकास के साथ उनके विक्रय का भी अधिकार मिलेगा। परियोजना में भाग लेने के लिए केवल आठ करोड़ रुपये की बिड सिक्योरिटी तय की गई थी।
विवाद इस बात को लेकर है कि सरकारी जमीन के विकास और उसके व्यावसायिक उपयोग का अधिकार निजी कंपनी को किन शर्तों के आधार पर दिया (Nava Raipur Nava Raipur) जा रहा है। तकनीकी मूल्यांकन पूरा होने से पहले ही वित्तीय बोलियों के इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने से मामला और चर्चा में आ गया। संभावित कानूनी चुनौती को देखते हुए प्राधिकरण ने पहले ही हाई कोर्ट में कैविएट भी दायर कर दी है।
फ्री सेल प्लाट का पूरा ब्योरा
योजना के दस्तावेजों के अनुसार कुल 232.34 एकड़ भूमि को फ्री सेल विकसित प्लाट के रूप में आरक्षित किया गया है। इनमें 219.89 एकड़ मिश्रित उपयोग वाली आवासीय और व्यावसायिक जमीन शामिल है। वहीं 12.45 एकड़ भूमि स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित की गई है। सेक्टर सी में 79.52 एकड़, सेक्टर बी में 52.85 एकड़ और सेक्टर ई में 50.41 एकड़ भूमि उपलब्ध रहेगी।
डेवलपर को नकद भुगतान नहीं होगा
प्राधिकरण का कहना है कि चयनित कंपनी को 1100 एकड़ क्षेत्र विकसित करने के बदले किसी प्रकार का सीधा भुगतान नहीं किया जाएगा। कंपनी को उसके हिस्से की जमीन दी जाएगी, जिसका विकास, उपयोग और बिक्री वह अपने स्तर पर कर सकेगी।
क्या बोले एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी
एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार के अनुसार, निविदा में पात्र और एल वन रहने वाली कंपनी को 137 एकड़ भूमि (Nava Raipur Township Project) दी जाएगी। इसके बदले वह पूरे 1100 एकड़ क्षेत्र का विकास करेगी। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से कोई नकद भुगतान नहीं होगा। कंपनी को मिलने वाली भूमि का उपयोग और विक्रय करने का अधिकार उसके पास रहेगा।


