मध्यप्रदेश

MP Land Records Digitization News : भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व सेवाएं होंगी अधिक प्रभावी, भूमि रिकॉर्ड प्राप्त करना होगा आसान

मध्य प्रदेश के नागरिकों को भूमि संबंधी सरकारी अभिलेखों की सहज, त्वरित और पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। पुराने भू-अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण के उद्देश्य से ‘डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम’ (DILRMP) के तहत प्रदेश में चरणबद्ध रूप से डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से राज्य के लगभग 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेख रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिसके लिए विशेष दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली और डीबीईएस सॉफ्टवेयर विकसित किए जा रहे हैं।

चरणबद्ध तरीके से हो रहा है काम, अब तक करोड़ों दस्तावेज स्कैन

राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत मॉडर्न रिकॉर्ड रूम (MRR) के अंतर्गत पुराने अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की रूपरेखा तैयार की गई है। योजना के फेज-1 (2013-2020) में लगभग 3,18,82,222 दस्तावेजों और फेज-2 (2021-22) में लगभग 2,39,24,462 दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य पहले ही पूर्ण किया जा चुका है। अब फेज-3 के तहत बचे हुए 15 करोड़ रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन का काम तेजी से किया जा रहा है।

पटवारी करेंगे आनलाइन गुणवत्ता परीक्षण

इस परियोजना (MP Land Records Digitization News) के तहत जिला स्तर पर अत्याधुनिक स्कैनिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की सुरक्षित स्कैनिंग, मेटा-डाटा एंट्री और भोपाल में डीबीईएस आधारित डबल-बाइंड डेटा एंट्री की व्यवस्था की गई है। आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्र के पटवारी द्वारा ऑनलाइन गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा। अंतिम रूप से सत्यापित रिकॉर्ड सीधे ‘भूलेख पोर्टल’ पर आम नागरिकों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।

जबलपुर-नर्मदापुरम में पहला चरण पूरा, अब भोपाल-सागर की बारी

योजना के प्रथम चरण में जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ दस्तावेजों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूरी कर ली गई है और वहां डेटा एंट्री का कार्य निरंतर जारी है। वहीं, दूसरे चरण में भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई 2026 से जमीनी कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों के प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

भू-अभिलेखों के पूरी तरह डिजिटल होने से राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही आम नागरिकों को अपनी जमीन के नक्शे-खसरे ऑनलाइन देखने और प्राप्त करने में आसानी होगी, जिससे दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।

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