Kala Namak Rice : काला नमक धान की खेती से बढ़ेगी कमाई, नर्सरी तैयार करते समय इन बातों का रखें खास ध्यान
खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही खेतों में धान की तैयारियां तेज (Kala Namak Rice) हो गई हैं। कई किसान इस बार सुगंधित काला नमक धान की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि इसकी मांग देश के साथ विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है। अच्छी गुणवत्ता और बेहतर उत्पादन के लिए सबसे अहम भूमिका मजबूत नर्सरी की होती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान शुरुआत से ही वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो कम बीज में भी मजबूत पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इससे रोपाई के बाद फसल की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन के साथ मुनाफा भी बढ़ने की संभावना रहती है।
सही समय पर करें नर्सरी की बुवाई Kala Namak Rice
विशेषज्ञों के अनुसार काला नमक धान की नर्सरी लगाने का उपयुक्त समय 15 जून से जुलाई के पहले सप्ताह तक माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में नर्सरी तैयार होने में लगभग 30 दिन लगते हैं।
एक हेक्टेयर खेत के लिए 25 से 30 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना जाता है। समय पर तैयार की गई नर्सरी से पौधे मजबूत बनते हैं और रोपाई के बाद तेजी से विकास करते हैं।
नर्सरी के लिए ऐसे तैयार करें खेत
नर्सरी ऐसी जगह तैयार करें जहां पानी की निकासी अच्छी हो और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो। खेत की दो से तीन बार अच्छी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बना लें और फिर छोटे छोटे बेड तैयार करें।
एक हेक्टेयर मुख्य खेत के लिए लगभग 1000 वर्ग मीटर नर्सरी क्षेत्र पर्याप्त माना जाता है। खेत तैयार करते समय प्रति 1000 वर्ग मीटर में करीब पांच क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है।
संतुलित मात्रा में दें रासायनिक खाद
नर्सरी में शुरुआती पोषण के लिए संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग जरूरी है। प्रति 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में लगभग 1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 1.5 किलोग्राम फॉस्फोरस और 1.5 किलोग्राम पोटाश का उपयोग किया (Kala Namak Rice) जा सकता है। यदि पौधों की बढ़वार धीमी दिखाई दे तो 500 ग्राम यूरिया का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं जिंक की कमी होने पर 250 ग्राम जिंक सल्फेट का घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है।
पानी का सही प्रबंधन जरूरी
बीज अंकुरित होने तक नर्सरी में हल्की नमी बनाए रखें। अंकुर निकलने के बाद आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करें। खेत में लंबे समय तक जलभराव या पूरी तरह सूखी स्थिति दोनों से बचना चाहिए। संतुलित नमी रहने पर पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और उनका विकास तेजी से होता है।
मजबूत नर्सरी से मिलेगी बेहतर पैदावार
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ और मजबूत पौधे ही अच्छी फसल की नींव होते हैं। सही समय पर नर्सरी तैयार करने, संतुलित पोषण देने और नियमित निगरानी रखने से पौधों की गुणवत्ता बेहतर होती है।
ऐसी पौध रोपाई के बाद तेजी से बढ़ती है, रोगों का बेहतर सामना (Kala Namak Rice) करती है और काला नमक धान की गुणवत्ता के साथ उत्पादन भी बढ़ाती है। इसका सीधा लाभ किसानों की आय में बढ़ोतरी के रूप में मिलता है।



