
-JD Vance H-1B Visa Controversy: विदेशी कर्मचारियों को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति के आरोपों पर विवाद
– माइक्रोसॉफ्ट, इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो समेत 8 कंपनियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया निलंबित
नई दिल्ली/नवप्रदेश। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के एच-1बी वीजा (JD Vance H-1B Visa Controversy ) पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को लेकर दिए गए बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। वेंस की ओर से विदेशी कर्मचारियों की तुलना कम कुशल और बंधुआ मजदूरों से किए जाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को बेबुनियाद और गलत बताते हुए कहा कि भारतीय कुशल कर्मचारियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एच-1बी वीजा व्यवस्था न केवल भारतीय पेशेवरों को रोजगार के अवसर देती है, बल्कि अमेरिकी कंपनियों की उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और नवाचार क्षमता को भी बढ़ाती है। इससे कंपनियों के शेयरधारकों की संपत्ति में भी वृद्धि होती है।
अमेरिकी कर्मचारियों से 20 हजार डॉलर कम वेतन देने का आरोप
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आरोप लगाया कि अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त किया जा रहा है। वेंस के अनुसार, एच-1बी वीजा पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को समान पदों पर कार्यरत अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में औसतन 20 हजार डॉलर कम वेतन दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि बाहरी कंपनियों को काम सौंपने वाली व्यवस्था में यह अंतर बढ़कर 48 हजार डॉलर तक पहुंच जाता है। वेंस का आरोप है कि इस तरह की नियुक्तियों से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और वेतन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
माइक्रोसॉफ्ट पर निशाना, 6 हजार कर्मचारियों की छंटनी का मुद्दा उठाया
वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2025 में लगभग 6 हजार अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि इसी अवधि में 6 हजार से अधिक एच-1बी वीजा को मंजूरी मिली। अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया कि माइक्रोसॉफ्ट की ओर से दाखिल किए गए 3,682 श्रम प्रमाणन आवेदनों में लगभग 1 हजार पद ऐसे थे, जिन पर पहले अमेरिकी कर्मचारी कार्यरत थे। प्रशासन ने इसे विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया के संभावित दुरुपयोग का मामला बताया है।
माइक्रोसॉफ्ट समेत 8 दिग्गज कंपनियों पर कार्रवाई
अमेरिकी श्रम विभाग ने वीजा कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग को लेकर माइक्रोसॉफ्ट, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी और एडोबी जैसी 8 बड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इन कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया गया है। इसके तहत अब संबंधित कंपनियों के नए श्रम प्रमाणन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पहले से लंबित आवेदनों की जांच और प्रक्रिया भी रोक दी गई है। इस कार्रवाई से अमेरिका में स्थायी निवास की प्रक्रिया से गुजर रहे विदेशी कर्मचारियों के आवेदन प्रभावित हो सकते हैं।
हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड समेत 9 विश्वविद्यालय भी जांच के दायरे में
अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई केवल सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों तक सीमित नहीं है। हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड समेत अमेरिका के 9 प्रमुख विश्वविद्यालयों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। इन संस्थानों को समन जारी किए गए हैं। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या विदेशी विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अमेरिका लाया जा रहा है, जिनसे स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा महानिरीक्षक स्तर पर यह भी जांच की जा रही है कि सरकारी वित्तीय सहायता से संचालित शोध परियोजनाओं पर विदेशी प्रभाव या वीजा नियमों के उल्लंघन का कोई असर पड़ा है या नहीं।
भारत का जवाब- वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में भारतीय प्रतिभाओं की बड़ी भूमिका
भारतीय विदेश मंत्रालय ने वेंस के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय कुशल कर्मचारियों ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत ने कहा कि एच-1बी वीजा के तहत काम करने वाले भारतीय पेशेवर अमेरिकी कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और तकनीकी नवाचार को भी मजबूत करते हैं। विदेश मंत्रालय ने विदेशी कुशल कर्मचारियों को बंधुआ मजदूर बताने जैसी टिप्पणियों को गलत और वास्तविकता से परे बताया है। भारत का कहना है कि वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की मजबूत स्थिति बनाए रखने में भारतीय प्रतिभाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।



