स्वास्थ्य

Healthy Life Expectancy Report : उम्र बढ़ी, लेकिन बीमारियों ने छीन लिए 10 साल

नई दिल्ली। विज्ञान और चिकित्सा में लगातार प्रगति के बावजूद दुनिया के सामने एक नई स्वास्थ्य चुनौती उभर रही है। लोग पहले की तुलना में अधिक उम्र तक जी रहे हैं, लेकिन जीवन के अंतिम ही नहीं, बल्कि कई साल बीमारियों और शारीरिक अक्षमताओं के साथ बिताने को मजबूर हैं। मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट पब्लिक हेल्थ’ (Healthy Life Expectancy Report) में प्रकाशित ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2023’ अध्ययन ने यह चिंताजनक तस्वीर पेश की है।

अध्ययन के अनुसार 1990 के बाद दुनिया भर में मार्बिडिटी गैप (Healthy Life Expectancy Report) यानी कुल जीवन प्रत्याशा और स्वस्थ जीवन प्रत्याशा के बीच का अंतर लगातार बढ़ा है। वर्ष 2023 में वैश्विक स्तर पर लोग अपने जीवन का औसतन 14.5 प्रतिशत हिस्सा बीमारियों के साथ बिता रहे हैं, जबकि 1990 में यह आंकड़ा 13.6 प्रतिशत था। स्वस्थ और कुल जीवन प्रत्याशा के बीच का अंतर भी 8.8 साल से बढ़कर 10.7 साल हो गया है।

भारत में बढ़ी उम्र, लेकिन सेहत नहीं (Healthy Life Expectancy Report)

भारत की तस्वीर भी चिंता बढ़ाने वाली है। वर्ष 1990 में देश में औसत जीवन प्रत्याशा 58.5 वर्ष और स्वस्थ जीवन प्रत्याशा 50.1 वर्ष थी। यानी लोग औसतन 8.4 साल अस्वस्थता के साथ जी रहे थे। वर्ष 2023 तक औसत जीवन प्रत्याशा बढ़कर 71.6 वर्ष हो गई, लेकिन स्वस्थ जीवन प्रत्याशा केवल 61 वर्ष तक पहुंची। इसका मतलब है कि आज एक भारतीय अपने जीवन के औसतन 10.6 वर्ष बीमारियों और शारीरिक अक्षमताओं के बीच गुजार रहा है।

महिलाओं पर ज्यादा भारी पड़ रहा अस्वस्थ जीवन

अध्ययन में सामने आया कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक उम्र तक जी रही हैं, लेकिन उन्हें अधिक वर्षों तक अस्वस्थता का सामना करना पड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर वर्ष 2023 में महिलाओं का मार्बिडिटी गैप 12.1 वर्ष रहा, जबकि पुरुषों का 9.3 वर्ष दर्ज किया गया। भारत में पुरुषों के लिए यह अंतर 1990 के 7.5 वर्ष से बढ़कर 2023 में 9.1 वर्ष हो गया। वहीं महिलाओं में यह 9.4 वर्ष से बढ़कर 12 वर्ष (Healthy Life Expectancy Report) तक पहुंच गया।

पीठ दर्द, मानसिक तनाव और मोटापा बड़ी वजह

अध्ययन के अनुसार कमर और पीठ दर्द, मांसपेशियों एवं हड्डियों से जुड़ी बीमारियां, अवसाद, चिंता, बढ़ता मोटापा और हाई ब्लड शुगर स्वस्थ जीवन छीनने वाले प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन बीमारियों के बड़े हिस्से को समय पर रोकथाम, बेहतर इलाज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञ बोले- अब लक्ष्य सिर्फ लंबी नहीं, स्वस्थ जिंदगी हो (Healthy Life Expectancy Report)

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के निदेशक क्रिस्टोफर मरे ने कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों का लक्ष्य केवल लोगों की उम्र बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें अधिक समय तक स्वस्थ रखना होना चाहिए।

अध्ययन की सह-लेखिका कैथरीन बिसिग्नानो ने भी कहा कि रोकथाम, शुरुआती उपचार और दीर्घकालिक स्वास्थ्य देखभाल में निवेश बढ़ाकर ही बीमारियों के साथ बिताए जाने वाले वर्षों को कम किया जा सकता है। स्वस्थ जीवन (Healthy Life Expectancy Report) को अब स्वास्थ्य नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य बनाया जाना चाहिए।

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