छत्तीसगढ़

Fertilizer Black Marketing : मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत और फिर बड़ी कार्रवाई, खाद विक्रेता के यहां छापा, हजारों बोरी उर्वरक जब्त

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार किसानों को निर्धारित दर पर खाद-बीज उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार लगातार सख्त कदम (Fertilizer Black Marketing) उठा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में प्राप्त शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सरगुजा जिले में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अंबिकापुर के नेहरूनगर (डीगमा) स्थित एक उर्वरक विक्रय केंद्र पर औचक निरीक्षण कर 3219 बोरी उर्वरक जब्त किए गए हैं तथा विक्रय केंद्र को सील कर दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एक कृषक ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई थी कि नेहरूनगर (डीगमा) स्थित मेसर्स सरगुजा कृषि राय केंद्र द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर उर्वरकों का विक्रय किया जा रहा है। शिकायत प्राप्त होते ही कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच प्रारंभ की।

जांच के दौरान शिकायतकर्ता किसान के बयान एवं ऑनलाइन भुगतान से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। जांच में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक विक्रय (Fertilizer Black Marketing) किए जाने की पुष्टि होने पर जिला स्तरीय टीम ने 25 जून को संबंधित प्रतिष्ठान पर औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान परिसर में उपलब्ध 3219 बोरी उर्वरक जब्त किए गए तथा संपूर्ण विक्रय केंद्र को सील कर दिया गया। कृषि विभाग की इस सख्त कार्रवाई से जिले के उर्वरक विक्रेताओं में स्पष्ट संदेश गया है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कार्रवाई के दौरान सहायक संचालक कृषि कुंवर साय पैंकरा, उर्वरक निरीक्षक जे. आलम, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सीताराम भगत सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अधिक कीमत पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध आगे भी लगातार निरीक्षण एवं कड़ी कार्रवाई (Fertilizer Black Marketing) जारी रहेगी। किसानों से भी अपील की गई है कि वे ऐसी किसी भी अनियमितता की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 अथवा कृषि विभाग को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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