पीओके में पाक के खिलाफ विद्रोह

Editorial: पाक अधिकृत कश्मीर में एक बार फिर पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह तेज हो गया है। पिछले तीन दिनों से पीओके के डेढ़ लाख लोग सड़को पर उतर आये हैं और पाकिस्तान से मुक्कमल आजादी की मांग कर रहे हैं। पीओके के लोगों के इस विद्रोह का नेतृत्व ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है जिसमें पीओके के प्रबुध लोग शामिल है और उनका किसी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना देना नहीं है इसके बावजूद इस संगठन पर आतंकवाद संबंधी धारा लगाकर उसे प्रतिबंधित कर दिया गया है।
जिससे पीओके में विद्रोह और भड़क गया। इस विद्रोह को कुचलने के लिए पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर ने वहां सेना को तैनात कर दिया है क्योंकि पीओके (Rebellion against Pakistan in PoK) की पुलिस ने अपने ही लोगों पर बर्बता करने से इंकार कर दिया था। नतीजतन बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को निलंबित कर वहां सेना की तैनाती कर दी गई और उसे विद्रोह को कुचलने की खुली छूट दे दी गई। सेना ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुध गोलियां बरसाई जिससे तीस लोगों के मारे जाने और लगभग सौ लोगों के घायक होने की बात पाकिस्तान ने खुद कबूल की है लेकिन मृतकों का आंकड़ा इससे कहीं बहुत ज्यादा बताया जा रहा है चूंकि पीओके में इंटरनेट बंद कर दिया गया है इसलिए वहां की स्थिति की जानकारी दुनिया के सामने नहीं आ रही है।
पाकिस्तान की मीडिया भी यह आशंका जता रही है कि पीओके में बड़ी संख्या में लोग मारे गये हैं। एक अनुमान के मुताबिक लगभग चार सौ लोगों की मौत हुई है और एक हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं । इस खबर को दुनिया से छुपाया जा रहा है। इधर पीओके में लोग सड़क पर निकलर आर्मी चीफ असीम मुनीर को दुसरा जनरल डायर बता रहे हैं और उन पर पीओके में कत्लेआम कराने का आरोप लगा रहे हैं। गौरतलब है कि पीओके जिसकी आबादी लगभग 65 लाख है वहां के लोग लंबे समय से मुलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। वहां के प्राकृतिक संसाधनों का पाकिस्तान दोनों हाथों से दोहन करना है लेकिन पीओके के लोगों को आज भी पीने के साफ पानी, बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं भी सुलभ नहीं हैं ऊपर से महंगाई का आलम यह है कि वहां के लोगों के सामने भूखों मरने की नौबत आ रही है।
इन सभी मुद्दो को लेकर वहां के लोग लंबे समय से आंदोलित है। ऊपर से अब वहां पाकिस्तान अपनी पि_ू सरकार बनाना चाहती है पीओके की संसद के लिए 27 जुलाई को आम चुनाव होने हैं और इसके लिए 12 सीटें आरक्षित की गई हैं। इन आरक्षित सीटों का ही पीओके के लोग विरोध कर रहे हैं। कहने को तो पाकिस्तान पीओके को आजाद कश्मीर कहता है लेकिन वहां के लोगों की आजादी छीन रखी है अब पीओके के लोग पाकिस्तान से आजादी हासिल करने के लिए निर्णायक संघर्ष करने का मन बना चुके हैं और पाकिस्तानी सेना की बर्बता के बावजूद वे सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। पीओके के मुज्जफराबाद तथा मीरपुर में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।
लोग सड़को पर आजादी की मांग करते हुए अपना आंदोलन तेज करते जा रहे हैं। भले ही वहां की गलियां लाशों से पट रही हैं इसके बावजूद वहां के आंदोलनकारियों का हौसला बुलंद है। पीओके में गृहयुद्ध के हालात निर्मित हो गये हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा किये जा रहे इस नरसंहार पर भारत ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है और वहां हो रहे मानवाधिकार के उल्लंघन की ओर विश्व समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। इंग्लैंड की राजधानी लंदन में पाकिस्तानी उच्चायोग के सामने पीओके के सैंकड़ो लोगों ने प्रदर्शन किया और पीओके की आजादी की मांग उठाई है। इधर पाकिस्तान पीओके में लोगों के आंदोलित होने का ठिकरा भारत के सिर पर फोड़ रहा है। पाकिस्तानी हुकमरान अपने पापों पर पर्दा डालने के लिए भारत को इसकर जिम्मेदार ठहरा रहे हैं कि वह पीओके में लोगों को भड़का रहा है जबकि हकीकत यह है कि पीओके के लोग खुद ही पाकिस्तान से अलग होकर भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं। इस विद्रोह से भारत का कोई लेना देना नहीं है।



