Weapon Exports : युद्ध लड़ने वाले देशों तक आखिर पहुंचते कहां से हैं हथियार, सामने आई दुनिया के पांच सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं की सूची
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध विराम को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच लोगों के बीच एक सवाल लगातार (Weapon Exports) सुनाई दे रहा है कि जब किसी देश में युद्ध छिड़ता है तो इतने बड़े पैमाने पर हथियार आखिर पहुंचते कहां से हैं। रक्षा बाजार को लेकर एक बार फिर जिज्ञासा बढ़ गई है और दुनिया के बड़े हथियार आपूर्तिकर्ता देशों पर नजरें टिक गई हैं।
रक्षा विशेषज्ञों की चर्चाओं से लेकर आम लोगों की बातचीत तक अब वैश्विक हथियार कारोबार चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे समय में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के कुछ चुनिंदा देश ही अधिकांश हथियारों की आपूर्ति करते हैं और यही देश वैश्विक रक्षा बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
दुनिया के हथियार कारोबार पर पांच देशों का दबदबा Weapon Exports
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक वैश्विक हथियार निर्यात का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल पांच देशों के पास है। यही देश दुनिया के अलग अलग क्षेत्रों में सैन्य उपकरणों की सबसे बड़ी आपूर्ति करते हैं।
अमेरिका सबसे बड़ा हथियार निर्यातक
हथियार निर्यात के मामले में अमेरिका पहले स्थान पर बना हुआ है। वैश्विक रक्षा बाजार में उसकी हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत है। अमेरिका अपने सहयोगी देशों को आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल रक्षा प्रणाली, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और नौसैनिक उपकरण उपलब्ध कराता है।
दूसरे स्थान पर पहुंचा फ्रांस
पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस ने हथियार निर्यात के क्षेत्र में तेज बढ़त दर्ज की है। राफेल लड़ाकू विमान, पनडुब्बी, युद्धपोत और आधुनिक सैन्य तकनीक की बढ़ती मांग ने उसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बना दिया है।
रूस, जर्मनी और चीन भी मजबूत खिलाड़ी
रूस की वैश्विक हिस्सेदारी पहले की तुलना में कुछ कम हुई है, लेकिन उसके लड़ाकू विमान, टैंक, मिसाइल और वायु रक्षा प्रणाली आज भी एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई देशों में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं।
जर्मनी आधुनिक पनडुब्बी, बख्तरबंद वाहन, सैन्य इंजन और भारी रक्षा उपकरण तैयार करने के लिए जाना (Weapon Exports) जाता है। इसी वजह से वह दुनिया के प्रमुख हथियार निर्यातकों की सूची में शामिल है।
वहीं चीन ने कम लागत वाले ड्रोन, मिसाइल प्रणाली, नौसैनिक जहाज और अन्य सैन्य उपकरणों के जरिए एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई देशों में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाई है। इसी कारण वह दुनिया के पांच सबसे बड़े हथियार निर्यातकों में गिना जाता है।
इन देशों पर इजरायल की नजर क्यों रहती है
रूस को लेकर इजरायल की चिंता यह रहती है कि आधुनिक सैन्य प्रणाली ईरान या सीरिया जैसे देशों तक पहुंच सकती है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन प्रभावित होने की आशंका रहती है।
चीन की तेजी से विकसित हो रही सैन्य तकनीक को लेकर भी इजरायल सतर्क रहता है। उसे आशंका रहती है कि यह तकनीक अप्रत्यक्ष रूप से उसके विरोधी समूहों तक पहुंच सकती है।
अमेरिका इजरायल का सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी माना जाता है। ऐसे में अमेरिका की रक्षा नीति, सैन्य बजट या हथियार आपूर्ति में किसी भी तरह का बदलाव इजरायल की सुरक्षा रणनीति पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।
फ्रांस और जर्मनी भी यूरोप के प्रमुख रक्षा निर्माता देशों में शामिल (Weapon Exports) हैं। जर्मनी की ओर से उपलब्ध कराई गई आधुनिक पनडुब्बियां इजरायल की नौसेना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। वहीं फ्रांस भी उन्नत सैन्य तकनीक और रक्षा उपकरणों का बड़ा निर्यातक है। क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान यूरोपीय देशों की रक्षा नीति और हथियार निर्यात से जुड़े फैसलों पर इजरायल लगातार नजर बनाए रखता है।



