संपादकीय

संपादकीय: एनसीईआरटी की किताब पर बवाल


Editorial: आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर इस साल भी देशभर में भाजपा ने ‘संविधान हत्या दिवस मनाया। इसी दिन एनसीईआरटी ने 9वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में आपातकाल का एक चैप्टर शामिल कर दिया है, जिसका उद्देश्य यह बताया गया है कि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियों और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। स्कूली पाठ्यक्रम में आपातकाल का पाठ शामिल किए जाने से विपक्ष ने बवाल मचाना शुरू कर दिया है। खासतौर पर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह स्कूली छात्रों को गलत जानकारी परोस रही है, जबकि खुद भाजपा पिछले बारह सालों से देश में अघोषित आपातकाल लगाए हुए है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देश के सामने मौजूद चुनौतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एनसीईआरटी ने आपातकाल पर एक नया पाठ जोड़ दिया है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट का कहना है कि भाजपा जब भी और जहां भी सत्ता में आती है, तो वह किताबों में बदलाव करती है तथा इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है। जबकि सरकार का कहना है कि आपातकाल का पाठ स्कूली पाठ्यक्रम में इसलिए जोड़ा गया है कि आज की पीढ़ी भारतीय लोकतंत्र के सामने खड़ी हो रही चुनौतियों को समझे और इसके लिए वह तैयार रहे, ताकि भविष्य में फिर कभी कोई सरकार देश पर आपातकाल थोपने का साहस न कर पाए।

गौरतलब है कि 26 जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने सिर्फ अपनी सत्ता को बचाए रखने के लिए देश में आपातकाल लागू कर दिया था। यह पहला मौका था जब देश को आपातकाल का दंश झेलना पड़ा था। आपातकाल में सभी नागरिकों के तमाम मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे और प्रेस पर भी सेंसरशिप लगा दी गई थी। विपक्षी नेताओं को चुन-चुन कर जेलों में ठूंस दिया गया था और इस दौरान पूरे देश में आबादी नियंत्रण के नाम पर लोगों की जबरिया नसबंदी की गई थी।

यहां तक कि न्यायपालिका के अधिकार भी सीमित कर दिए गए थे ताकि पीडि़त पक्ष न्याय की गुहार न लगा सके। इसी दौरान भारतीय संविधान में मनमाने ढंग से 42वां संशोधन भी किया गया था। कुल मिलाकर न सिर्फ संविधान की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई थी, बल्कि प्रेस की आजादी छीनकर नागरिक अधिकारों को भी कुचल दिया गया था। यह लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय है, जिससे वर्तमान पीढ़ी वाकिफ नहीं है। ऐसे में यदि भावी पीढ़ी को आपातकाल की त्रासदी से अवगत कराने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में आपातकाल पर नया चैप्टर जोड़ा गया है, तो इसका विरोध करना समझ से परे है।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी लंबे समय से केंद्र की एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर संविधान की अनदेखी करने का आरोप लगा रही है और यह भी दावा कर रही है कि पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत में अघोषित आपातकाल लागू कर दिया गया है। यदि ऐसा होता तो विपक्ष के नेताओं को भी सरकार के खिलाफ ऐसी बात बोलने की आजादी नहीं मिलती। जिस मोदी सरकार ने पिछले 12 साल के अपने कार्यकाल के दौरान धारा 356 का भी उपयोग नहीं किया और न ही किसी भी चुनी हुई राज्य सरकार को बर्खास्त किया, वह सरकार आपातकाल लगाने की सोच भी कैसे सकती है!

जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान दर्जनों बार धारा 356 के तहत राज्य सरकारों को बर्खास्त किया गया था। मोदी सरकार के सामने भी ऐसे कई अवसर आए जब वह विपक्षी पार्टियों की राज्य सरकारों को बर्खास्त कर सकती थी, किंतु उसने ऐसा नहीं किया। अब भारत में कोई भी सरकार आपातकाल न लगा पाए, इसके लिए आपातकाल के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक किया जाना चाहिए।

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