संपादकीय

Editorial: संसद परिसर में नई नौटंकी

संसद का मानसून सत्र इस बार भी हंगामों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है यह गनीमत है कि विपक्ष के हंगामे के बावजूद एंटी पेपर लीक विधेयक और वंदे मातरम् विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है किन्तु अभी महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के अलावा कई और महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पेश होना बाकी है लेकिन विपक्ष जिस तरह हंगामा कर रहा है उसे देखते हुए इन विधेयकों का पारित होना तो दूर की बात है इनका पेश होना ही मुश्किल नजर आ रहा है।

एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने मुद्दे से अलग हटकर आरोप प्रत्यारोप लगाये उससे ही यह स्पष्ट हो गया है कि विपक्ष अपने दायित्व के प्रति गंभीर नहीं है। उसने हंगामा करना ही अपना मकसद बना रखा है। संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है अब जंतर मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ रखा है वही टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी ने संसद के बाहर अनोखा प्रदर्शन किया उन्होंने टीएमसी छोड़ गये 20 सांसदों को गद्दार बताते हुए उनके फोटो का प्रदर्शन किया।

दूसरे दिन पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पूू यादव ने तो सारी सीमाएं ही लांघ डाली और उन्होंने संसद परिसर में भगवा पहनकर साधू के वेश में चंदा चोरी करने की नौटंकी की। इस दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद पप्पू यादव के सामने चंदा चोर गद्दी छोड़ के नारे लगाते रहे। पप्पू यादप जिन्होंने रामलला की फोटो हाथों में ले रखी थी उन्होंने सपा सांसद अवधेश प्रसाद के पैर पकड़कर माफी मांगने का अभिनय किया और इस दौरान उन्होंने रामलला की फोटो अवधेश प्रसाद के पैरों के सामने जमीन पर रख दी। यह न सिर्फ रामलला का बल्कि पूरे सनातन धर्म का अपमान है लेकिन इस नौटंकी को देख रहे तमाम विपक्षी सांसद जिसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल थे वे सभी खिलखिलाकर हंस रहे थे।

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव इस कर्तूत की संत समाज ने कड़ी निंदा की है और इसे सनातन का घोर अपमान बताया है। विपक्षी पार्टियों के सांसद जिस तरह संसद के भीतर और बाहर रोज नया तमाशा खड़ा कर रहे हैं और संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं वह एक तरह से लोकतंत्र का मजाक ही है। ऐसा लगता है कि विपक्ष ने यह तय कर रखा है कि मानसून सत्र को चलने ही नहीं देना है और महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश होने से ही रोकना है।

पेपरलीक मामला सुलट गया तो अब चंदा चोरी के मामले को लेकर तमाशा खड़ा किया जा रहा है। इस मुद्दे को समाजवादी पार्टी ही जोर शोर से उठा रही है। क्योंकि उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और इस तरह की नौटंकी करके इसका चुनावी लाभ उठाना चाहती है। वहीं कांग्रेस गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर अड़ गई है। विपक्ष का यह रवैया कतई उचित नहीं है। उन्हें अपनी जो भी बात कहनी है उसे वे संसद के भीतर रख सकते हैं। बेहतर होगा कि वे संसद परिसर को राजनीति का अखाड़ा न बनाये और मानसून सत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक चर्चा करें।

Related Articles

Back to top button