संपादकीय

आपराधिक तत्वों पर कार्यवाही जरूरी

नीट पेपरलीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने जो आंदोलन किया था उस दौरान हिंसा की भी घटनाएं हुई थी। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों में शामिल अराजक तत्वों ने पुलिस पर हमले किये थे। पत्थरबाजी की थी। पुलिस के वाहनों और नीजि वाहनों को क्षतिग्रस्त किया था। उत्तेजित भीड़ ने संसद परिषद में घुसने के लिए बेरिकेट्स तोड़े थे ऐसे में पुलिस को उनके खिलाफ कार्यवाही करनी पड़ी थी इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया है और यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि आंदोलन के दौरान जिन लोगों के खिलाफ अराजकता फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है उसकी पुलिस जांच जारी रख सकती है।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम आयु वाले सभी छात्रों को तत्काल रिहा करने के आदेश दिये हैं इसकी एवज में बच्चों के अभिभावकों से बॉन्ड भराया जा सकता है प्रदर्शन के दौरान जहां पुलिस बल ने ज्यादती की है उसकी भी जांच कराने के सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आंदोलन के दौरान जिन लोगों ने अराजकता फैलाई है उनकी जांच की जाये और ऐसे तमाम अपराधिक पृष्ठभूमि वालों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्यवाही की जाये जिनपर पूर्व में अपराधिक मामले दर्ज हैं। निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वागत योग्य है।

यह ठीक है कि भारतीय संविधान सभी को अपनी जायज मांगो को लेकर धरना, प्रदर्शन करने की स्वतंत्रता देता है लेकिन ऐसे आंदोलन शांतिपूर्ण होने चाहिए यदि आंदोलन के नाम पर अराजकता फैलाई जाएगी और देश में आग लगाने की कोशिश की जाएगी तो ऐसे असमाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी ही चाहिए है। किन्तु कॉकरोच जनता पार्टी को सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला रास नहीं आ रहा है। उसके प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि जिनपर पहले से ही अपराध दर्ज है उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा यह फैसला कॉकरोच जनता पार्टी को मंजूर नहीं है।

उन्होंने बयान दिया है कि सरकार के साथ हमारा यही समझौता हुआ था कि किसी भी पदर्शनकारी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा किन्तु अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक शर्त का उल्लंघन हो रहा है इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर फिर से बड़ा आंदोलन करने पर बाध्य होगी। गौरतलब है कि आंदोलन के दौरान अराजकता फैलाने वाले लोगों की पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू कर दी है। सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से लिये गये फोटो से 2873 लोगों की पहचान हुई है जो आदतन अपराधी हैं।

इन लोगों ने आंदोलनरत छात्रों की भीड़ में घुसकर न सिर्फ आपत्तिजनक और देशविरोधी नारे लगाये बल्कि पुलिस बल पर हमला भी किया और तोडफ़ोड़ की थी। इन चिन्हित लोगों में से लगभग एक हजार लोग ऐसे हैं जिनके खिलाफ विभिन्न थानों में गंभीर अपराध दर्ज हैं। इन में से 101 लोगों पर हत्या का आरोप है तो 62 लोगों पर हत्या के प्रयास का जुर्म दर्ज है वहीं 66 लोग रेप के आरोपी है। और इनमें से छह लोग ऐसे हैं जिन पर पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज है। लगभग300 लोगों के खिलाफ लूट और डकैती के मामले चल रहे हैं ऐसे अपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों ने आंदोलनकारियों के बीच जो उत्पाद मचाया था उन्हें कैसे बख्शा जा सकता है।

समझ में नहीं आता कि कॉकरोच जनता पार्टी ऐसे आदतन अपराधियों की वकालत क्यों कर रही है। जब आंदोलन के दौरान हिंसा फैली थी तब अभीजित दीपके ने मीडिया के सामने यह बयान दिया था कि हिंसा फैलाने वाले लोग कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक नहीं है। ये असमाजिक तत्व हैं जिनसे हमारा कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने तो यह भी आरोप लगाया था कि ये सभी भाजपा के गुंडे हैं जो हमारे आंदोलन को बदनाम करने के लिए हिंसक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

यदि कॉकरोचों के मुताबिक ये आपराधिक तत्व भाजपा के गुंडे हैं तो इनके खिलाफ पुलिस जो कार्यवाही कर रहि है उससे कॉकरोचों के पेट में दर्द क्यों हो रहा है इन्हें तो खुश होना चाहिए कि भाजपा के गुंडो के खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो रही है। बहरहाल अब सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद दिल्ली पुलिस ने आंदोलन के नाम पर अराजकता फैलाने वाले लोगों के खिलाफ अपनी कार्यवाही तेज कर दी है और ऐसे असमाजिक तत्वों के खिलाफ आम जनता भी सड़को पर इन आराजक तत्वों ने लगभग ढाई सौ पुलिस कर्मचारियों को पत्थर मारकर घायल किया था और कई पुलिस अफसरों की लिंचिंग करने की भी कोशिश की थी जिसमें आईपीएस अफसर भी शामिल है ऐसे में पुलिस तो अब ऐसे अपराधियों की पूरी जन्म कुंडली खंगालेगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करेगी।

भले ही इस कार्यवाही के विरोध में एक बार फिर कॉकरोच जनता पार्टी चाहे तो आंदोलन कर ले लेकिन एक बात उसे याद रखनी चाहिए कि अपराधिक तत्वों के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुलिस कार्यवाही कर रही है। ऐसे में अब उनका यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना भी माना जाएगा। रही बात उनके आंदोलन की धमकी देने की तो उनकी यह गिदड़भभकी कोई काम नहीं आएगी और न ही आम जनता का उन्हें समर्थन मिलेगा। बेहतर होगा कि कॉकरोच अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सिरोधार्य करें।

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